लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है, और इस पूरे बदलाव के केंद्र में पार्टी सुप्रीमो मायावती के परिवार के दो युवा चेहरे आकाश आनंद और उनके छोटे भाई ईशान आनंद हैं। एक तरफ जहां आकाश आनंद लगातार पार्टी से अपनी दूरियां बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मायावती ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में एक बेहद बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है।
सबसे पहले बात करें आकाश आनंद की, तो उन्होंने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अपना बायो बदल दिया है। कुछ समय पहले तक वह अपने बायो में खुद को बसपा का नेशनल कन्वीनर यानी राष्ट्रीय संयोजक बताते थे। इसके बाद उन्होंने नेशनल कन्वीनर का पद हटाकर अपने बायो में केवल ‘बसपा कार्यकर्ता’ लिख लिया था। लेकिन अब इसमें एक बार फिर बदलाव हुआ है। आकाश आनंद ने अपने बायो से ‘बसपा कार्यकर्ता’ शब्द भी पूरी तरह हटा दिया है और अब उसकी जगह सिर्फ ‘बसपा समर्थक’ लिख दिया है।
यानी राजनीतिक गलियारों में यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या आकाश आनंद अब बसपा में केवल एक समर्थक की भूमिका तक ही सीमित रह गए हैं? खास बात यह है कि पार्टी संगठन में हुए इन नए फेरबदल के बाद आकाश आनंद का नाम किसी भी प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारी की सूची में दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य और बसपा में उनकी आगामी भूमिका को लेकर अटकलों और चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
ईशान आनंद को मिली मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी
इस पूरे घटनाक्रम के दूसरे अहम केंद्र बिंदु आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद (जिन्हें ईशू भी कहा जाता है) हैं। मायावती ने उन्हें संगठन में एक बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया है। ईशान आनंद को देश के करीब 15 राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा करने की अहम जिम्मेदारी दी गई है। अब वह इन सभी राज्यों में बसपा की राजनीतिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखेंगे, संगठन की जमीनी स्थिति की समीक्षा करेंगे और पार्टी के कामकाज से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। सबसे अहम बात यह है कि ईशान आनंद अपनी इन सभी संगठनात्मक गतिविधियों की रिपोर्ट सीधे अपने पिता और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को सौंपेंगे।
दल के भीतर परिवार की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच बसपा के भीतर पार्टी और परिवार की भूमिका को लेकर नए सिरे से सवाल खड़े होने लगे हैं। एक तरफ आकाश आनंद, जिन्हें कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था, उनकी सक्रिय भूमिका लगातार सिमटती हुई नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलना पार्टी के भीतर एक नए राजनीतिक समीकरण की ओर साफ इशारा कर रहा है। हालांकि, मायावती की राजनीतिक कार्यशैली में संगठनात्मक फैसले हमेशा से बेहद नपे-तुले और रणनीतिक रहे हैं।
यही वजह है कि ईशान को मिली इस नई जिम्मेदारी को सिर्फ एक सामान्य पद के तौर पर देखना जल्दबाजी हो सकती है। लेकिन यह स्पष्ट है कि बसपा के भीतर परिवार के इन दोनों युवा चेहरों को लेकर अब तस्वीर पहले जैसी नहीं रही है। आकाश आनंद का ‘नेशनल कन्वीनर’ से सफर तय करते हुए ‘बसपा कार्यकर्ता’ और अब सीधे ‘बसपा समर्थक’ तक पहुंचना, और ठीक इसी बीच ईशान आनंद का करीब 15 राज्यों की कमान संभालना इन दोनों घटनाओं ने बहुजन समाज पार्टी की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।
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