हम उस घड़ी की प्रतीक्षा करेंगे, जब हमें स्पष्ट बहुमत प्राप्त हो…. आज आप मेरा उपहास उड़ा लें लेकिन एक वक्त ऐसा आएगा जब लोग आपका उपहास उड़ाएंगे। दो दशक पहले जब एक वोट से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी तब लोकसभा में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने उनका उपहास किया था। लोकसभा में कांग्रेस को लेकर अटल बिहारी वाजपेयी ने जो भविष्यवाणी की थी, वह आज सच साबित हो रही है। कांग्रेस के सांसद गिरधर गोमांग ने ओडिशा के मुख्यमंत्री रहते लोकसभा में मतदान किया था और उसी एक वोट ने बाजी पलट दी थी। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों खासतौर से कांग्रेस का प्रदर्शन शर्मनाक रहा है। आज कांग्रेस को अटल की वो बातें चुभ रही होंगी। कांग्रेस को याद हो न हो, पर सोशल मीडिया पर लोग उसे वो लाइनें याद दिला रहे हैं। सोशल मीडिया पर #atalbiharivajpayee ट्रेंड हो रहा है।
जी हां, आज अटल बिहारी वाजपेयी की दो दशक पुरानी वो बातें लोगों को फिर याद आ रही हैं। 2014 में भाजपा के केंद्र में आने के बाद से देश के राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस का पतन होता गया। पांच राज्यों में चुनाव हुए तो पंजाब में उसकी सत्ता थी और नतीजे आए तो वह उसे भी गंवा बैठी। वोट शेयर देखिए तो हैरानी होगी। जिस उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के दिग्गज नेता निकले उसी राज्य में पार्टी को 2.33 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि भाजपा को 41.29 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं। पंजाब जहां पर उसकी सत्ता थी, वहां कांग्रेस को 22.98 प्रतिशत और आम आदमी पार्टी को 42.01 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं।
तब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि एक दिन पूरे देश में कमल खिलेगा। दो दशक पहले उन्होंने भाजपा के दृढ़ निश्चय को सामने रखते हुए संसद में कहा था कि हमने मेहनत की है, हमने संघर्ष किया है। यह 365 दिन चलने वाली पार्टी है। ये चुनाव में कोई कुकुरमुत्ते की तरह उगने वाली पार्टी है…हम बहुमत का इंतजार करेंगे। भाजपा के लिए वो इंतजार समाप्त हो गया है। पिछले 8 सालों से पार्टी लोकसभा हो या विधानसभा चुनावों में बंपर वोट हासिल कर रही है।
वैसे तो भाजपा के बीज आजादी मिलने के फौरन बाद बो दिए गए थे, लेकिन जनसंघ के बाद भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में हुआ। तत्कालीन कांग्रेस की सरकारों के तुष्टीकरण के फैसलों और राम मंदिर अभियान के सहारे भाजपा ने लोकसभा में 2 सीटों से अपना सफर शुरू किया और आज वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है। कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि उसके पास फुल टर्म अध्यक्ष भी नहीं हैं। उनके युवा और बड़े नेता भाजपाई हो चुके हैं। आज के चुनावी माहौल और जनादेश देखकर ऐसा लगता है कि जनता को कांग्रेस पर भरोसा नहीं रहा।
आज के समय में कांग्रेस सबसे कमजोर विपक्षी दल बन चुकी है। यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजे ही देख लीजिए, 2016 में बनी अपना दल (सोनेलाल) ने इस बार चुनावों में 12 सीटें जीत लीं और कांग्रेस मात्र 2 सीटें ही जीत सकी।
-एजेंसियां
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