दुबई चैम्बर्स की मुंबई में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

मुंबई (अनिल बेदाग): दुबई के क्राउन प्रिंस, उप प्रधान मंत्री, रक्षा मंत्री और दुबई की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की उपस्थिति में दुबई चैंबर्स ने मुंबई में एक उच्च स्तरीय व्यापार बैठक का आयोजन किया, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात और भारत दोनों के वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक […]

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ज़ी 5 ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत “कोस्टाओ” की घोषणा की

मुंबई (अनिल बेदाग) : सेजल शाह द्वारा निर्देशित और विनोद भानुशाली द्वारा निर्मित, कोस्टाओ एक हाई-ऑक्टेन क्राइम ड्रामा है, जो गोवा के सबसे बड़े तस्कर से लोहा लेने वाले मेवरिक कस्टम अधिकारी के जीवन से प्रेरित है। जब आप गोवा के बारे में सोचते हैं, तो शायद आपके दिमाग में जीवंत समुद्र तट और जीवंत […]

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हवाई अड्डे पर कहर बरपाती रेड रोज़ क्वीन उर्वशी रौतेला

मुंबई (अनिल बेदाग) : सुंदर और करिश्माई वैश्विक सुपरस्टार उर्वशी रौतेला वर्तमान में अपने हालिया एयरपोर्ट स्पॉटिंग पल के साथ दिल जीत रही हैं। खूबसूरत दिवा को एक सुंदर और आकर्षक लाल फूलों वाले गुलाब की पोशाक पहने देखा गया था और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, […]

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बाबा साहेब की विरासत पर सत्ता की सियासत, जयंती या सत्ता का स्वार्थी तमाशा?

“जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी”, “मूर्ति की पूजा, विचारों की हत्या”, “हाथ में माला, मन में पाखंड” प्रियंका सौरभ बाबा साहब के विचारों—जैसे सामाजिक न्याय, जातिवाद का उन्मूलन, दलित-पिछड़ों को सत्ता में हिस्सेदारी, और संविधान की गरिमा की रक्षा—को आज के राजनेता पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। राजनीतिक दल केवल वोट बैंक के […]

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अंबेडकर जयंती विशेष: लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी

डॉ सत्यवान सौरभ लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें न्याय, समानता, संवाद, स्वच्छता, कर भुगतान, और संस्थाओं के प्रति सम्मान जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय […]

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सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये

प्रियंका सौरभ भारत में सरकारी स्कूल सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार के प्रतीक हैं, लेकिन बजट कटौती, ढांचागत कमी और शिक्षकों की अनुपलब्धता ने इनकी साख गिराई है। हरियाणा इसका ताजा उदाहरण है, जहाँ 2022 में 292 स्कूल बंद हुए, और 2024 में 800 और स्कूलों को बंद करने की योजना है। सरकारें नामांकन […]

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सत्ता, शहादत और सवाल: जलियांवाला बाग की आज की प्रासंगिकता

डॉ सत्यवान सौरभ जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) केवल ब्रिटिश अत्याचार का प्रतीक नहीं, बल्कि आज के भारत में सत्ता और लोकतंत्र के बीच जटिल रिश्ते का प्रतिबिंब भी है। जनरल डायर द्वारा किए गए नरसंहार ने स्वतंत्रता संग्राम को दिशा दी, लेकिन यह भी सिखाया कि जब सत्ता निरंकुश हो जाए और जनता मौन, तो […]

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“जनता का धन, निजी लाभ: खिलाड़ियों के इनाम पर सवाल”

परिणाम चाहे जो भी हो, ईनाम देना जरूरी। पदक नहीं मिला, पर ईनाम मिल गया — क्या यह नैतिकता है? डॉo सत्यवान सौरभ,कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट चार करोड़ रुपये — एक बड़ी राशि है। यह पैसा किसी व्यक्तिगत कोष से नहीं आया, बल्कि यह जनता के खून-पसीने की कमाई है। क्या […]

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शिक्षा या कमीशन? निजी स्कूलों की किताबों के पीछे छुपा मुनाफाखोरी का खेल

प्रियंका सौरभ निजी स्कूल एनसीईआरटी की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण किताबों की बजाय, कमीशन के लालच में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बच्चों पर थोपते हैं। हर साल जानबूझकर पाठ्यक्रम में मामूली बदलाव कर किताबें बदल दी जाती हैं ताकि पुराने संस्करण बेकार हो जाएं। स्कूलों और प्रकाशकों के गठजोड़ से चुनिंदा दुकानों पर ही ये […]

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नया भारत और फुले का सपना: “ज्योतिबा फुले का भारत बनाना अभी बाकी है”

प्रियंका सौरभ फुले केवल उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे आज भी जाति, लिंग और वर्ग आधारित असमानताओं के खिलाफ एक जीवंत विचारधारा हैं। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक समानता का हथियार बनाया, महिलाओं और दलितों के लिए स्कूल खोले, और ब्राह्मणवादी सत्ता संरचना को खुली चुनौती दी। आज भी जब शिक्षा का […]

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