Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। दो दिन के कार्य बहिष्कार के बाद प्रदेश भर के साथ मथुरा में भी विद्युत विभाग के कर्मचारी काम पर लौट आये। बुधवार को सभी कार्यालय विधवत खुले और सामान्य तरीके से कामकाज हुआ। संयुक्त संघर्ष समिति की उच्च स्तर पर बनी सहमति से इकाई के कर्मचारी नेताओं को भी रात को ही अवगत कराया दिया गया था जिससे सुबह सभी कार्यालय नियत समय पर खुले और कामकाज समान्य तरीके से हो सका।
विभाग अब राजस्व वसूली को बढाने के लिए कमर कस रहा है
हडताल का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेताओं ने बताया कि उच्च स्तर पर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल के साथ एक कमेटी की मीटिंग हुई जिसमें प्रदेश के उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, वित्त मंत्री, चीफ सेक्रेटरी भी मौजूद थे। दोनों पक्षों में हुए समझौते में लिखित तौर पर कहा गया है कि निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाता है। किसी अन्य संस्था को देने का भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। विद्युत कर्मचारियों को विश्वास में लेकर सुधार के प्रयास किये जाएंगे। उर्जा क्षेत्र में कहीं भी कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों को विश्वास में लेकर काम किया जाये तो कहीं किसी तरह की कोई समस्या नहीं होगी। निजीकरण का प्रस्ताव वापस ले लिया गया है, यह पहले ही पैरा में कहा गया है कि भविष्य में भी कर्मचारियों को विश्वास में लेकर ही निजीकरण किया जा सकेगा।
वहीं विभागीय अधिकारियों का यह भी कहना था कि यह एक मौका है। कुछ दिन के लिए हो सकता है कि खतरा टल गया हो लेकिन अभी शंकाएं बरकरार हैं। असल जड राजस्व वसूली और लाइन लॉस है। विभाग अब राजस्व वसूली को बढाने के लिए कमर कस रहा है। इसके लिए हर स्तर पर सख्ती बरती जाएगी। सप्लाई और दूसरी सेवाओं को लेकर किसी को कोई दिक्कत नहीं है असल वजह राजस्व वसूली और लाइन लॉस है।
ऊर्जा मंत्री ने तीन जुलाई को दिये थे सख्त निर्देश
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने तीन जुलाई हाईलाइन फीडर में लाइन लास कम करने के निर्देश दिये थे। अधीक्षण अभियंता ग्रामीण विनोद गंगवार का कहना है इसके बाद 45 दिन गांव गांव गये। कुछ लोगों ने उनकी बात सुनी, कई ने नहीं सुनी। 350 से अधिक गांव चिन्हत किये गये हैं जिनमें 100 या इससे अधिक ऐसे बकायेदार हैं जिन्होंने एक साल से बिल जमा नहीं किया है। 10 हजार से बडे बकायेदारों को भी निशाने पर लिया जा रहा है। विनोद गंगवार का कहना है अकेले उन्हीं के क्षेत्र में अगस्त में 120 और सितम्बर में 250 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं। अगस्त में 10 और सितम्बर में 15 करोड से अधिक की वसूली हो चुकी है।
35700 उपभोक्ताओं से होगी सबसे पहले वसूली
सर्व प्रथम विद्युत विभाग के निशाने पर 357 गांवों के 35700 उपभोक्ता है। इन की सूची पहले ही तैयार की जा चुकी थी। अब इनके खिलाफ कार्रवाही शुरू की गई है। सघंन वसूली अभियान के लिए कुल 357 गांव चुने गये हैं, जिनमें 100 से अधिक उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने एक साल से भुगतान नही किया है। इसके अलावा उन उपभोक्ताओं के कनेक्शन भी काटे जाएंगे जिनके उपर 10 हजार से ज्यादा का बकाया है।
देहात में आधे उपभोक्ता ही कर रहे नियमित भुगतान
देहात क्षेत्र में करीब 2 लाख 16 हजार उपभोक्ता हैं जिनमें से 1 लाख 6 हजार ने भुगतान नहीं किया है। कुल मिला कर पूरे जनपद में 395 करोड बिजली बकाया है जिनमें शहरी और ग्रामीण सभी तरह के उपभोक्ता शामिल हैं।
88 कारोड सरकारी विभागों पर बकाया
सरकारी विभागों पर करीब 88 करोड की देनदारी बकाया चल रही है। कुल मिला कर पूरे जनपद में 395 करोड बिजली बकाया है जिनमें शहरी और ग्रामीण सभी तरह के उपभोक्ता सामिह हैं। सरकारी विभागों पर करीब 88 करोड की देनदारी बकाया चल रही है। इसके लिए भी संपर्क किया जा रहा है। ग्राम प्रधानों को बकाये दारों की सूची सौंप दी गई है। वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि इन में से करीब 80 ग्राम प्रधान ऐसे हैं जिन्होंने खुद बिल जमा नहीं किया है।
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