भागदौड़ भरी ज़िंदगी और उससे उपजे तनाव के कारण आज ज़्यादातर लोग नींद ने आने की समस्या पीड़ित हैं। नींद ने आने की इस समस्या को इन्सोमनिया भी कहा जाता है। आपने कई लोगों को अकसर कहते हुए सुना होगा कि यार, आजकल मुझे नींद ही नहीं आती। सोने की कोशिश करने के बावजूद मैं सो नहीं पाता या पाती। ऐसे लोग इन्सोमनिया से ग्रस्त हो सकते हैं।
इन्सोमनिया कैसे और क्यों होता है
इन्सोमनिया कभी भी और किसी को भी हो सकता है। यह आमतौर पर लाइफस्टाइल में बदलाव होने की वजह से होता है। यह दो तरह का होता है-ट्रान्जिएंट और क्रॉनिक। इन्सोमनिया यानी अनिद्रा किसी भी वजह से हो सकती है। जैसे कि टेंशन, वातावरण में बदलाव, बहुत ज़्यादा काम करना या फिर हॉर्मोंन्स में बदलाव।
कैसे बचें इन्सोमनिया से
सबसे पहले तो अपना बेड-टाइम रूटीन बदल लें। रिलैक्सिनंग शावर लें। म्यूजिक सुनें। बेड पर जाने के बाद टीवी, मोबाइल चेक न करें। ऑफिस के ईमेल्स चेक न करें। इससे आपकी नींद में कोई बाधा नहीं आएगी।
कॉफी से बचें
कई लोग बहुत कॉफी पीते हैं। यहां तक कि दोपहर को भी उनकी कॉफी चलती रहती है। ऐसे लोग कॉफी पीना बंद कर दें। खासकर दोपहर के बाद।
शराब से दूरी
अगर आप शराब के आदी हैं तो इससे तौबा कर लें। वैज्ञानिक भी कह चुके हैं कि शराब नींद कंट्रोल करने वाले ENT1 जीन को प्रभावित करता है।
सोने के पैटर्न में बदलाव
सोने का एक जैसा पैटर्न बना लें। हर रात एक ही वक्त पर अपने बिस्तर पर जाएं। ऐसा करने से आपके शरीर को आदत हो जाएगी और फिर टाइम से नींद आने लगेगी।
सुबह के वक्त एक्सर्साइज
सुबह के वक्त ठीक से एक्सर्साइज करने से नींद बेहतर आती है। नींद न आने की समस्या अगर जटिल हो तो माइंडफुलनेस मेडिटेशन से फायदा मिलता है।
सीबीटी थेरपी
नींद बुलाने में कॉगनिटिव बिहेविरल थेरपी भी काफी कामगर है। इस थेरपी को सीबीटी थेरपी कहा जाता है लेकिन इसे किसी ट्रेंड थेरपिस्ट से ही कराएं।
-एजेंसियां
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