आमतौर पर माना जाता है कि अगर कपल की आदतें एक-दूसरे से मिलती जुलती हैं तो उनका रिश्ता ज्यादा मजबूत होता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि समान इंट्रेस्ट होने के कारण मतभेद होने के चांस कम होते हैं। हालांकि, सेम पर्सनैलिटी होना रिलेशनशिप को सफल बनाए इसकी कोई गारंटी नहीं है।
अमेरिका के जरनल ऑफर रिसर्च इन पर्सनैलिटी में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, लोगों का अपने साथी में खुद की पर्सनैलिटी जैसी समानता तलाशना उनकी सुखी शादीशुदा जिंदगी या लव लाइफ को सुनिश्चित नहीं करता। इस स्टडी में 2,578 ऐसे कपल्स पर रिसर्च की गई जिनकी शादी को 20 साल या उससे ज्यादा हो गए हैं।
यूएस की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर बिल चॉपिक के मुताबिक, ‘लोग आमतौर पर अपने पार्टनर में देखते हैं कि वह उनके साथ कितने कम्पैटबल हैं, लेकिन सही साथी चुनने में सिर्फ यही बात मायने नहीं रखती। इसकी जगह लोगों को यह जानने की कोशिश करना चाहिए कि क्या उन्हें जो पसंद है वह अच्छा व्यक्ति है? क्या उसे ऐंग्जाइटी इशू है? ये चीजें किसी भी रिलेशनशिप को बना या बिगाड़ सकती हैं।’
स्टडी के मुताबिक, सिमिलर पर्सनैलिटी होने के साथ ही जिनके पार्टनर ईमानदार और अच्छे होते हैं वह अपनी रिलेशनशिप से ज्यादा संतुष्ट महसूस करते हैं। वहीं सिमिलर पर्सनैलिटी होने के बावजूद यदि पार्टनर न्यूरॉटिक और एक्सट्रोवर्ट है तो रिलेशनशिप सैटिस्टफेक्शन कम होता है।
स्टडी में यह भी कहा गया कि मैच मेकिंग ऐप्स जो सिमिलर पर्सनैलिटी के आधार पर लोगों को पार्टनर का सुझाव देते हैं, वह भले ही पॉप्युलर हों लेकिन वे सही नहीं हैं।
चॉपिक के मुताबिक, ‘जब आप मैच मेकिंग के लिए एल्गोरिद्म का सहारा लेते हैं तो आपको शख्स के बारे में वास्तव में उतना नहीं पता होता जितना की आप सोचते हैं आपको पता है। हमें नहीं पता कि दिल किसी को क्यों पसंद करता है, लेकिन एक बात तो तय है कि इसमें से सिर्फ कम्पैटिबिलिटी फैक्टर को ध्यान में रखने का एंगल हटाया जा सकता है।’
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