13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में जन्मी सरोजनी नायडू की मृत्यु 02 मार्च 1949 को इलाहाबाद में हुई थी। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक नामी विद्वान तथा माँ कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। सरोजिनी नायडू को काव्य लेखन का हुनर विरासत में मिला था इसलिए
उन्होंने भी मात्र 13 वर्ष की आयु में ‘लेडी ऑफ दी लेक’ नामक कविता रची। इसी दौरान उन्होंने लगभग 2000 पंक्तियों का एक विस्तृत नाटक लिखकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।
1895 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गईं और पढ़ाई के साथ-साथ कविताएँ भी लिखती रहीं। वहां वे उस दौर के प्रतिष्ठित कवि अर्थर साइमन और एडमंड गॉस से मिलीं। गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। उनके दूसरे तथा तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम तथा ब्रोकन विंग ने उन्हें एक सुप्रसिद्ध कवयित्री बना दिया।
उनके वैज्ञानिक पिता चाहते थे कि वो गणितज्ञ या वैज्ञानिक बनें, पर उनकी रुचि कविता में थीं।
नायडू की शादी 19 साल की उम्र में डॉ. एम. गोविंदराजुलु नायडू से हुईं तथा वे लगभग बीस वर्ष तक कविताएं और लेखन कार्य करती रहीं और इस समय में उनके तीन कविता-संग्रह प्रकाशित हुए। उनके कविता संग्रह ‘बर्ड ऑफ़ टाइम’और ‘ब्रोकन विंग’ने उन्हें एक प्रसिद्ध कवयित्री बनवा दिया।
सरोजिनी नायडू को भारतीय और अंग्रेज़ी साहित्य जगत की स्थापित कवयित्री माना जाने लगा था किंतु वह स्वयं को कवि नहीं मानती थीं। उनका प्रथम काव्य संग्रह ‘द गोल्डन थ्रेसहोल्ड’ 1905 में प्रकाशित हुआ जो काफी लोकप्रिय रहा।
वे अपने आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। उनके एक भाई विरेंद्रनाथ क्रांतिकारी थे और एक भाई हरिद्रनाथ कवि, कथाकार और कलाकार थे।
देश की राजनीति में कदम रखने से पहले सरोजिनी नायडू दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी के साथ काम कर चुकी थीं। गांधी जी वहां की जातीय सरकार के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे और सरोजिनी नायडू ने स्वयंसेवक के रूप में उन्हें सहयोग दिया था। इसी तरह 1930 के प्रसिद्ध नमक सत्याग्रह में सरोजिनी नायडू गांधी जी के साथ चलने वाले स्वयंसेवकों में से एक थीं।
सरोजिनी नायडू को विशेषतः ‘भारत कोकिला’, ‘राष्ट्रीय नेता’ और ‘नारी मुक्ति आन्दोलन की समर्थक’के रूप में सदैव याद किया जाता रहेगा।
-एजेंसियां
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