नई दिल्ली। भारत सरकार ने सोमवार को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए वर्ष 2027 में होने वाली 16वीं जनगणना के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है। यह जनगणना न केवल पूरी तरह डिजिटल होगी, बल्कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार जाति आधारित जनगणना होगी।
बताते चलें कि आजाद भारत में पहली बार जाति आधारित जनगणना की घोषणा 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार ने की थी, जिसे राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCPA) ने मंजूरी दी। यह जनगणना 1 मार्च 2027 से शुरू होने वाली है, जिसमें चार राज्यों से शुरुआत होगी और पहाड़ी राज्यों में 1 अक्टूबर 2026 से प्रक्रिया आरंभ होगी।
बता दें कि ब्रिटिश शासन के दौरान 1872 से 1931 तक नियमित रूप से जाति आधारित जनगणना होती थी, जिसमें 1931 की जनगणना में 4,147 जातियां दर्ज की गई थीं। आजादी के बाद, 1951 से जनगणना में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आंकड़े शामिल किए गए, अन्य जातियों की गणना नहीं की गई। 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) कराई गई, लेकिन इसके आंकड़े पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुए।
जाति आधारित जनगणना को जहां समर्थक दल बता रहे हैं कि यह कदम सामाजिक न्याय, संसाधन वितरण, और लक्षित नीतियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। तो वहीं कुछ आलोचकों का कहना है कि इससे सामाजिक विभाजन बढ़ सकता है।
16 वर्ष बाद सामने आएगा डेटा
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, लेकिन 2021 में कोविड के चलते जनगणना नहीं हो पाई। अब 16 वर्षों बाद देश की जनसंख्या, घरों, जातियों और सामाजिक स्थिति का नया डेटा सामने आएगा। जातिगत जनगणना-2027 का उद्देश्य नीति निर्माण को अधिक समावेशी और लक्षित बनाना है।
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