रक्षाबंधन के बदलते मायने: परंपरा से आधुनिकता तक
प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार रक्षाबंधन का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं, दिल पर बंधता है। यह एक वादा है—साथ निभाने का, सुरक्षा का, और बिना कहे समझ लेने का। बहन की राखी में वो मासूम दुआ होती है जो शब्दों में नहीं कही जाती, और भाई की आंखों में वो संकल्प होता […]
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