अंबेडकर जयंती विशेष: लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी

डॉ सत्यवान सौरभ लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें न्याय, समानता, संवाद, स्वच्छता, कर भुगतान, और संस्थाओं के प्रति सम्मान जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय […]

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सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये

प्रियंका सौरभ भारत में सरकारी स्कूल सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार के प्रतीक हैं, लेकिन बजट कटौती, ढांचागत कमी और शिक्षकों की अनुपलब्धता ने इनकी साख गिराई है। हरियाणा इसका ताजा उदाहरण है, जहाँ 2022 में 292 स्कूल बंद हुए, और 2024 में 800 और स्कूलों को बंद करने की योजना है। सरकारें नामांकन […]

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“जनता का धन, निजी लाभ: खिलाड़ियों के इनाम पर सवाल”

परिणाम चाहे जो भी हो, ईनाम देना जरूरी। पदक नहीं मिला, पर ईनाम मिल गया — क्या यह नैतिकता है? डॉo सत्यवान सौरभ,कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट चार करोड़ रुपये — एक बड़ी राशि है। यह पैसा किसी व्यक्तिगत कोष से नहीं आया, बल्कि यह जनता के खून-पसीने की कमाई है। क्या […]

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कलम से खींची गई नई सरहदें: स्याही की सादगी… प्रियंका सौरभ की चुपचाप क्रांतिकारी कहानी

हर युग में कुछ आवाज़ें होती हैं जो चीखती नहीं, बस लिखती हैं — और फिर भी गूंजती हैं। ये आवाज़ें न नारे लगाती हैं, न मंचों पर दिखाई देती हैं, लेकिन उनके शब्द पिघलते लोहे की तरह समाज के ज़मीर को गढ़ते हैं। प्रियंका सौरभ ऐसी ही एक आवाज़ हैं — जो लेखनी की […]

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“गाँव से ग्लोबल तक: डॉ. सत्यवान सौरभ की कलम की उड़ान”

(संघर्ष, साहित्य और संवेदना, हरियाणा की माटी से निकला साहित्य का सितारा, शब्दों से समाज तक,युवा साहित्य का उगता सूरज) भारत की मिट्टी ने सदैव ऐसे रचनाकारों को जन्म दिया है जिन्होंने समाज, संस्कृति और विचारों को नई दिशा दी है। इन्हीं में एक विशिष्ट नाम है डॉ. सत्यवान सौरभ, जो अपनी लेखनी के माध्यम […]

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HPSC की PGT लेक्चरर भर्ती में ऑर्थो कोटे का फर्जीवाड़ा: क्या अब आयोग को मेडिकल बोर्ड गठित करना चाहिए?

हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा आयोजित PGT (Post Graduate Teacher) लेक्चरर भर्ती में विकलांगता कोटे, विशेष रूप से ऑर्थोपेडिक (Ortho) श्रेणी के तहत फर्जीवाड़े के आरोप सामने आ रहे हैं। कई चयनित अभ्यर्थियों ने 80% या उससे अधिक विकलांगता का दावा किया, जबकि जांच या प्रत्यक्ष अवलोकन में वे सामान्य रूप से शारीरिक गतिविधियों […]

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अमेरिका के टैरिफ़ निर्णय और भारत के लिए संभावनाएँ – पूरन डावर

अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अपने टैरिफ्स की घोषणा कर दी है। 5 अप्रैल से अमेरिका में हर निर्यात पर 10% अतिरिक्त टैरिफ और 10 अप्रैल से घोषित टैरिफ लागू होंगे। यह टैरिफ उस देश के साथ व्यापार घाटे के आधार पर तय किए गए हैं और यह अब तक जिस देश के साथ जो […]

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लेखक की स्वतंत्रता बनाम संपादकीय नीति: बहस के नए आयाम

डॉo सत्यवान सौरभ,कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट संपादक आमतौर पर अनूठी और मौलिक रचनाएँ चाहते हैं ताकि उनकी पत्रिका की विशिष्टता बनी रहे। दूसरी ओर, लेखकों को यह स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे अपनी रचनाएँ अधिक से अधिक स्थानों पर भेज सकें, खासकर जब संपादक बिना किसी समयसीमा के रचनाओं को स्वीकार […]

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एचकेआरएनएल कर्मचारियों की दुर्दशा: सरकारी व्यवस्था का एक और छलावा

प्रियंका सौरभ लेखिका स्वतन्त्र पत्रकार और कवयित्री है। जब भी हरियाणा विधानसभा में खाली सरकारी पदों को भरने की मांग उठती है, सरकार इन कर्मचारियों को केवल आंकड़ों की बाजीगरी में इस्तेमाल करती है। सरकार यह दिखाने का प्रयास करती है कि उसने रोजगार उपलब्ध करा दिया है, लेकिन वास्तविकता में इन कर्मचारियों को केवल […]

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घिब्ली की दुनिया बनाम हकीकत: कला, रोजगार और मौलिकता का संघर्ष

प्रियंका सौरभ रोजगार हमारी ज़रूरतों के लिए आवश्यक है, लेकिन कला और मनोरंजन मानसिक शांति और प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। घिब्ली स्टाइल इमेजरी और एआई टूल्स सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं, जिससे मौलिकता पर सवाल उठ रहे हैं। पहले जहां कलाकारों को महीनों मेहनत करनी पड़ती थी, अब एआई कुछ सेकंड […]

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