एयर इंडिया हादसा: जवाबदेही किसकी है, और कब तय होगी?

12 जून 2025 को अहमदाबाद के आसमान में जो हुआ, वह सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं थी — यह उस पूरे ढांचे का मलबा था, जो कागज़ों में “रिफॉर्म” के नाम पर चमकता है, सरकार और निजी क्षेत्र जिसे ‘सुधार’ और ‘आधुनिकीकरण’ की चमकदार पैकेजिंग में जनता को दिखाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में वह […]

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टेकऑफ से पहले अंत: 242 ज़िंदगियाँ और एक सवालों से भरा आसमान

“ड्रीमलाइनर या डेथलाइनर?: जब उड़ान ही आख़िरी सफर बन गई” “हादसे की ऊँचाई से गिरते सवाल: अहमदाबाद की एक दोपहर” प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार अहमदाबाद की सुबह सामान्य थी। लोग अपनी-अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह दिन भारत की नागरिक उड्डयन प्रणाली पर एक गहरा धब्बा […]

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मैच फिक्स किए गए चुनाव लोकतंत्र के लिए जहर हैं: राहुल गांधी

मैंने तीन फरवरी को संसद में दिए अपने भाषण और उसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया को लेकर चिंता जाहिर की थी. देश में हुए चुनावों को लेकर मैंने पहले भी संदेह जताया है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हर चुनाव में और हर जगह […]

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राखीगढ़ी: इतिहास की परतों में छुपी स्त्री, संस्कृति और सभ्यता का पुनर्पाठ

प्रियंका सौरभ हरियाणा स्थित राखीगढ़ी हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल है, जहाँ से मिले 4600 साल पुराने महिला कंकाल, शंख की चूड़ियाँ और ताम्र नृत्यांगना की प्रतिमा सभ्यता में स्त्री की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हैं। डीएनए विश्लेषण ने ‘आर्य आक्रमण सिद्धांत’ पर सवाल उठाए हैं और भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को सिद्ध […]

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विश्व पर्यावरण दिवस: क्या आपने आज साँस ली?

“क्या आपने आज साँस ली?” शायद हाँ। तो शुक्र मनाइए, लेकिन डॉक्टर का नहीं, सरकार का नहीं, उस प्रकृति का, जिसने बिना बिल भेजे, बिना पहचान माँगे, एक और दिन जीने का मौका दिया। लेकिन अब ज़रा सोचिए, अगर कल सुबह से ऑक्सीजन मीटर लग जाए, और हर लीटर पर शुल्क तय हो जाए, तो […]

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दोस्ती या मौत की सैर: जब यार ही यमराज बन जाएं, तो मां-बाप किस पर भरोसा करें?

डॉ सत्यवान सौरभ हरियाणा में इन दिनों एक डरावना चलन पनपता दिख रहा है। हर हफ्ते कहीं न कहीं से यह खबर आती है कि कोई युवा दोस्तों के साथ घूमने गया और लौट कर अर्थी में आया। ये घटनाएं केवल अखबार की सुर्खियां नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने और व्यवस्था की खामियों की वीभत्स […]

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2 जून की रोटी को लेकर सोशल मीडिया पर आई मीम्स की बाढ़, जानिए क्या है पूरा माजरा!

जून का महीना आते ही लोगों को दो चीजों की याद सबसे ज्यादा आती है, एक तो बेहाल करने वाली गर्मी से बचाने के लिए बारिश की, और दूसरा, ‘2 जून की रोटी’ की! आपने अक्सर लोगों से दो जून की रोटी के बारे में सुना होगा. कोई मजाक […]

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अश्लील वीडियो की वायरल संस्कृति: मनोरंजन या मानसिक विकृति?

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार जब सोशल मीडिया हमारे जीवन में आया, तो उम्मीद थी कि यह विचारों को जोड़ने, संवाद को मज़बूत करने और जन-जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। लेकिन आज, 2025 में, विशेषकर फेसबुक जैसे मंच पर जिस तरह से अश्लीलता और फूहड़ता का आतंक फैलता जा रहा है, […]

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बदलते युग का नया तमाशा: कुलवधुएँ फरार हैं! पुरुषों की निगरानी पर स्त्रियों का ‘रिवर्स स्ट्राइक’

प्रियंका सौरभ समाज में अब बेटी की निगरानी नहीं, दादी और सास की होती है। तकनीक और आज़ादी के इस युग में रिश्तों की परिभाषा बदल गई है। जहाँ पहले लड़कियों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता थी, अब वही महिलाएं अपनी आज़ादी के साथ नई दुनिया की खोज में हैं। पुरुषों की निगरानी पर स्त्रियाँ […]

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भर्ती में समानता की वापसी: सामाजिक-आर्थिक बोनस अंकों पर हाईकोर्ट की सख्ती

प्रियंका सौरभ भारतीय लोकतंत्र का मूल मंत्र है – समान अवसर। लेकिन जब अवसरों की तुलना में विशेष सुविधाएं या बोनस अंक बांटे जाएं, तो यह उस मूल भावना को ही चोट पहुंचाता है। हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में भर्ती प्रक्रियाओं में सामाजिक-आर्थिक आधार पर दिए जा रहे […]

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