भावनात्मक शोषण की सामाजिक हकीकत: क्यों रिश्तों में मौन रहने वाला ही सबसे अधिक आहत होता है?
प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार मनुष्य का जीवन रिश्तों के ताने-बाने से ही आकार लेता है। परिवार, मित्रता, प्रेम, सहयोग और सामाजिक संबंध—ये सभी हमारे अस्तित्व को अर्थ प्रदान करते हैं। किंतु आज के समय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि रिश्तों में संवेदनशीलता की जगह स्वार्थ ने ले ली है और […]
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