आगरा। शीत लहर और कड़ाके की ठंड को देखते हुए जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल के साथ नगर निगम क्षेत्र में संचालित रैन बसेरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शीत लहर से बचाव की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और जरूरतमंदों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।
जिलाधिकारी ने सबसे पहले एसएन मेडिकल कॉलेज, एमजी रोड स्थित रैन बसेरे का निरीक्षण किया। इसके बाद वह आईएसबीटी पहुंचे, जहां रैन बसेरे में ठहरे जरूरतमंदों से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। आश्रय लिए लोगों ने यहां उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। कानपुर देहात निवासी आजाद सिंह और कन्नौज के मिनहाज ने बताया कि वे रेलवे परीक्षा देने आगरा आए थे और बेहतर व्यवस्था देखकर शीत लहर से बचाव के लिए रैन बसेरे में ही ठहर गए। जिलाधिकारी ने दोनों को परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने रैन बसेरे में रखे फीडबैक रजिस्टर का अवलोकन किया, जिसमें आश्रय प्राप्त लोगों द्वारा संतोषजनक प्रतिक्रिया दर्ज की गई थी। गैस हीटर, चार्जिंग प्वाइंट, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था को भी परखा गया, जो संतोषजनक पाई गई।
इसके बाद जिलाधिकारी भागीरथी देवी मार्ग, खंदारी स्थित मसाला मठरी केंद्र शेल्टर होम पहुंचे। यहां पंजाब निवासी सुखजिंदर ने बताया कि रैन बसेरे में घर जैसा वातावरण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जहां-जहां रैन बसेरे संचालित हैं, वहां मुख्य मार्गों पर स्पष्ट साइन बोर्ड लगाए जाएं, ताकि जरूरतमंदों को इन्हें खोजने में कठिनाई न हो। साथ ही पर्याप्त संख्या में गैस हीटर, गद्दे, पानी, प्रकाश और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने फुटपाथों पर सो रहे असहाय बुजुर्गों और जरूरतमंदों से संवाद कर उन्हें नजदीकी रैन बसेरे में आश्रय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि शीत लहर के दौरान कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे न सोए। जिला प्रशासन द्वारा शीतलहर से बचाव के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि सभी रैन बसेरे 24 घंटे खुले रहें और किसी भी समय जरूरतमंद व्यक्ति को आश्रय मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि रात्रि के समय सड़क किनारे, रोड पटरी या खुले स्थानों पर कोई भी व्यक्ति सोता न मिले। शहरी क्षेत्र में बनाए गए शेल्टर होम और रैन बसेरों में आमजन के ठहरने की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है, जहां सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।
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