आगरा में 10 साल की बालिका से सामूहिक दुष्कर्म का मामला; पॉक्सो कोर्ट ने पांच साल बाद तीनों दोषियों को सुनाई उम्रकैद और 50-50 हजार का जुर्माना

Crime

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के एत्मादपुर थाना क्षेत्र में 10 साल की एक मासूम बालिका के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) के लगभग पांच साल पुराने बहुचर्चित मामले में विशेष अदालत ने दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कुंदन किशोर सिंह की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (Life Imprisonment) और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत के स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें छह-छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस न्यायपूर्ण फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने गहरी संतुष्टि व्यक्त की है।

क्या थी पूरी घटना?

अभियोजन पक्ष से प्राप्त विवरण के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना 18 जुलाई 2021 की है। एत्मादपुर क्षेत्र की रहने वाली 10 वर्षीय बालिका अपने घर के पास ही स्थित एक पड़ोसी के घर फ्रिज से बर्फ लेने जा रही थी। तभी रास्ते में पड़ोसी शौकत के बेटे सोनी ने उसे रोककर बहलाया और कहा कि उसकी मां उसे घर के अंदर बुला रही हैं।

मासूम बालिका जब विश्वास करके घर के अंदर पहुंची, तो वहां सोनी की मां मौजूद नहीं थीं। घर के अंदर पहले से ही जाहिद (पुत्र रशीद खान) और आदिल (पुत्र गुड्डू) मौजूद थे।

कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था अंजाम

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सोनी, जाहिद और आदिल ने मिलकर घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और मासूम बालिका के साथ बारी-बारी से सामूहिक दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। कुछ देर बाद जब पीड़िता की चीख-पुकार उसकी मां तक पहुंची, तो वह दौड़कर मौके पर पहुंची और दरवाजा खुलवाया। अंदर का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उनकी बेटी बुरी तरह लहूलुहान हालत में पड़ी थी।

परिजनों ने बिना देर किए बालिका को लेकर सीधे थाने का रुख किया। पुलिस ने पीड़िता का तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण (Medical Examination) कराया और परिजनों की तहरीर के आधार पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

पुलिस की विवेचना और अदालत का फैसला

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित गति से विवेचना पूरी की और तीनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में पुख्ता आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल किया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में चल रही थी। सभी गवाहों, साक्ष्यों और चिकित्सकीय रिपोर्टों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद शुक्रवार को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

​अदालत के इस कड़े और न्यायसंगत फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। परिवारजनों का कहना है कि पांच साल की लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उनकी बेटी को न्याय मिल गया है, जिससे उनका न्यायपालिका पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

Dr. Bhanu Pratap Singh