आगरा। बहू के इलाज के लिए लिया गया सात लाख रुपये का कर्ज एक महिला को अपराध की अंधी दुनिया में खींच ले गया। बहू की अकाल मृत्यु के बाद कर्ज के बोझ से उबरने के लिए उसने चोरी का रास्ता चुना, लेकिन धीरे-धीरे यह मजबूरी उसकी आदत बन गई। कर्ज का पूरा पैसा चुका दिए जाने के बाद भी उसके हाथ से चोरी का शौक नहीं छूटा और वह देश के अलग-अलग शहरों में सर्राफा कारोबारियों को अपना निशाना बनाने लगी।
आगरा के थाना सदर बाजार क्षेत्र में 15 लाख रुपये के सोने के आभूषण चोरी करने के इस सनसनीखेज मामले में आखिरकार पुलिस ने शातिर महिला को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से धर दबोचा है। पुलिस ने उसके कब्जे से करीब 30 लाख रुपये कीमत के भारी मात्रा में सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए हैं।
इस शातिर महिला तक पहुँचने के लिए आगरा पुलिस को किसी फिल्मी कहानी की तरह करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी पड़ी। सर्राफा बाजार की तंग गलियों से शुरू हुई जाँच का दायरा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हाईवे तक फैल गया। पुलिस टीम ने एक-एक कैमरे की कड़ी जोड़ते हुए महिला का पीछा किया और आखिरकार ग्वालियर जा पहुंची। चार नवंबर को सटीक मुखबिर की सूचना पर रेलवे कॉलोनी के पास घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
ग्राहक बनकर आई, चूड़ियों से भरा डिब्बा लेकर भागी
यह पूरी दुस्साहसिक घटना बीते 31 अक्टूबर की है। थाना सदर बाजार क्षेत्र के सुल्तानपुरा सर्राफा बाजार स्थित एक ज्वैलर्स की दुकान पर एक बुजुर्ग महिला सामान्य ग्राहक की तरह पहुँची। उसका आचार-व्यवहार ऐसा था कि दुकानदार को उस पर किसी प्रकार का कोई शक नहीं हुआ। इसी दौरान उसने शातिराना अंदाज में मौका पाकर सोने की चूड़ियों के पांच सेट से भरा पूरा डिब्बा पार कर दिया और मौके की भीड़ का फायदा उठाकर वहाँ से रफूचक्कर हो गई।
कुछ देर बाद जब दुकानदार की नजर डिब्बे पर पड़ी और वह गायब मिला, तो दुकान में हड़कंप मच गया। आसपास काफी तलाश करने के बाद भी जब महिला का कोई सुराग नहीं लगा, तो पीड़ित दुकानदार ने थाना सदर बाजार में लिखित तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। चोरी गए सोने के इन आभूषणों की कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई थी।
कई दिन पहले कर चुकी थी दुकान की रेकी
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में यह बात सामने आई कि महिला ने इस वारदात को अचानक आवेश में आकर अंजाम नहीं दिया था। वह कई दिनों से लगातार सर्राफा बाजार में घूम रही थी और चुनिंदा दुकानों की कार्यप्रणाली व गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही थी। उसने पहले बाजार की सघन रेकी की और फिर सोची-समझी रणनीति के तहत ग्राहक बनकर दुकान के अंदर दाखिल हुई। मौका मिलते ही उसने माल समेट लिया और फरार हो गई।
मामले की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर सदर बाजार थाना पुलिस के साथ-साथ सर्विलांस सेल और एसओजी (नगर जोन) की विशेष टीमों को खुलासे के लिए लगाया गया। पुलिस ने घटनास्थल और वहाँ से भागने वाले सभी संभावित रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया।
200 कैमरों की फुटेज खंगालते हुए ग्वालियर पहुँची पुलिस
महिला की सही पहचान और उसकी वर्तमान लोकेशन का सुराग लगाने के लिए पुलिस ने सर्राफा बाजार से लेकर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मुख्य हाईवे तक के लगभग 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया। अलग-अलग स्थानों की फुटेज की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने उसके भागने के रूट का सटीक पता लगाया।
टेक्निकल सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से जाँच की सुई ग्वालियर जा टिकी। चार नवंबर को पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि वह महिला ग्वालियर में रेलवे कॉलोनी के पास मौजूद है। बिना देर किए पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की और उसे दबोच लिया। जब उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से सोने-चांदी के जेवरों का एक बड़ा जखीरा बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, बरामद माल की कुल अनुमानित बाजार कीमत करीब 30 लाख रुपये है, जिसमें सदर बाजार से उड़ाए गए 15 लाख के गहने भी शामिल हैं।
तलाशी में मिला सोने-चांदी के जेवरों का जखीरा
पुलिस द्वारा की गई बरामदगी में ज्वैलरी का बड़ा स्टॉक मिला है, जिसमें मुख्य रूप से 16 पीली धातु की चूड़ियाँ, 10 ब्रेसलेट व 5 सोने की चेन, 5 जोड़ी चांदी की पायल व एक मछली, 12 सिक्के व 5 जोड़ी बिछिया, 29 अंगूठियाँ व 3 अन्य अंगूठियाँ व 3 अतिरिक्त चेन, एक घुंघरू, 4 कंगन और 3 जोड़ी कान के टॉप्स इसके अलावा पुलिस को महिला के पास से उसका आधार कार्ड और नकद 270 रुपये भी बरामद हुए हैं।
7 लाख के कर्ज से शुरू हुई थी अपराध की दास्ताँ
पूछताछ के दौरान महिला ने पुलिस के सामने अपनी जिंदगी से जुड़ा जो सच उगला, वह बेहद चौंकाने वाला था। उसने बताया कि कुछ साल पहले उसकी बहू अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गई थी। बहू की जिंदगी बचाने के लिए उसने साहूकारों और अन्य लोगों से लगभग सात लाख रुपये का भारी-भरकम कर्ज लिया था। तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टर उसकी बहू को बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
बहू की मौत के बाद परिवार पर कर्ज चुकाने का भारी मानसिक और आर्थिक दबाव आ गया। इसी विपत्ति से पार पाने के लिए उसने पहली बार चोरी के रास्ते पर कदम रखा। पहली वारदात में जब वह पकड़ी नहीं गई, तो उसके अंदर का डर खत्म हो गया और उसे लगा कि इस आसान तरीके से कर्ज चुकाया जा सकता है। धीरे-धीरे चोरी उसकी फितरत बन गई। समय बीतने के साथ उसने लोगों का सारा कर्ज तो चुका दिया, लेकिन जुर्म की यह लत उसके स्वभाव का हिस्सा बन चुकी थी।
आगरा समेत कई शहरों को बना चुकी थी निशाना
पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि कर्ज उतर जाने के बाद भी उसने चोरी करना नहीं छोड़ा। वह आगरा के अलावा देश के अन्य कई बड़े शहरों में भी ज्वैलर्स की दुकानों पर आम ग्राहकों की तरह जाती और पलक झपकते ही आभूषणों पर हाथ साफ कर देती थी। वह इन वारदातों को पूरी तरह अकेले ही अंजाम देती थी। फिलहाल, पुलिस बरामद हुए जेवरों की शिनाख्त कराने में जुटी है ताकि यह पता चल सके कि उसने किन-किन अन्य शहरों या दुकानों को अपना निशाना बनाया है और उसके खिलाफ किन-किन थानों में मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस टीम के लिए 25 हजार का पुरस्कार
इस ब्लाइंड केस का पर्दाफाश करने, 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर ग्वालियर तक पहुँचने और शातिर महिला को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम की उच्चाधिकारियों ने जमकर सराहना की है। इस उत्कृष्ट और साहसिक कार्य के लिए पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
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