आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के सिकंदरा थाना क्षेत्र स्थित भावना एस्टेट में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर उपजा विवाद violent (हिंसक) रूप ले बैठा। टी-पॉइंट पर स्थित एक कैफे के संचालक रवि चतुर्वेदी पर कुछ लोगों द्वारा लाठी-डंडों से जानलेवा हमला करने और उनका सिर फोड़ने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि हमलावरों ने न केवल संचालक के साथ बर्बरता की, बल्कि कैफे में घुसकर एक लाख रुपये से अधिक की संपत्ति और सामान को भी बुरी तरह तोड़ दिया। स्थानीय थाने में नामजद तहरीर देने के बावजूद जब पुलिस ने उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की, तो पीड़ित पशु प्रेमियों के साथ डीसीपी कार्यालय जा पहुंचा।
जानलेवा हमले की धाराएं हटाने का दबाव बनाने का आरोप
पीड़ित रवि चतुर्वेदी (पुत्र स्वर्गीय सतीश चंद्र चतुर्वेदी, निवासी राम रघु आनंदा फेज-2, आगरा) का कहना है कि भावना एस्टेट के पास उनका कैफे है। कुछ लोग वहां पहुंचे और कुत्तों को खाना खिलाने का विरोध करते हुए उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट करने लगे। इस हमले में उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद जब वे न्याय की गुहार लगाने सिकंदरा थाने पहुंचे, तो पुलिस ने कथित तौर पर जानलेवा हमले का जिक्र किए बिना हल्की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने का दबाव बनाया।
पीड़ित पक्ष ने पुलिस के इस रवैये का कड़ा विरोध किया और पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाओं (कैस्पर्स होम, पीएफए और एसपीसीए) के तमाम पदाधिकारियों के साथ डीसीपी कार्यालय का रुख किया। डीसीपी कार्यालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में मोनू यादव, जीतू यादव उर्फ अन्ना और रामू यादव सहित अन्य लोगों को नामजद किया गया है। पीड़ित ने यह भी दावा किया है कि इस पूरी घटना की सीसीटीवी फुटेज उनके पास मौजूद है, जो आरोपियों की करतूत को बेनकाब करती है। उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की भी पुरजोर मांग की है।
पशु कल्याण संगठनों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
डीसीपी कार्यालय पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में पशु अधिकारों और कल्याण के लिए कार्य करने वाले कई प्रमुख चेहरे शामिल थे। इनमें एसपीसीए से कैस्पर्स होम की संचालिका विनीता अरोरा, पीएफए से ऋचा गुप्ता व राम अवतार, एसपीसीए से विनोद गर्ग आचार्य, कैस्पर्स होम से सुरेखा पसरीचा व के. बग्गा, पीड़ित रवि चतुर्वेदी व गीता चतुर्वेदी, तथा हाथरस एसपीसीए से दिव्यांश शर्मा और अलीशा शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने उच्चाधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी और दोषियों के खिलाफ तत्काल गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों की ओर से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई और जल्द एफआईआर दर्ज किए जाने का ठोस आश्वासन मिलने के बाद प्रतिनिधिमंडल को राहत मिली।
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