आगरा, 18 अगस्त 2026: आर्थिक तंगी के कारण जिन गरीब परिवारों के लिए अपने नौनिहालों का महंगा इलाज कराना असंभव सा हो जाता है, उनके लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। इसका एक ताजा और जीवंत उदाहरण विकास खंड अछनेरा के ग्राम साधन निवासी गजेंद्र पाल सिंह के परिवार में देखने को मिला है।
गजेंद्र पाल सिंह के घर 24 नवंबर 2024 को पुत्री लविश्का का जन्म हुआ था। जन्म के कुछ समय पश्चात ही परिवार को यह बेहद दुखद और चिंताजनक जानकारी मिली कि नन्हीं लविश्का के दिल में छेद (Congenital Heart Defect) है। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण माता-पिता बच्ची का महंगा उपचार कराने में पूरी तरह असमर्थ थे। शुरुआत में परिवार को बीमारी की गंभीरता और सरकार द्वारा दी जाने वाली चिकित्सीय सहायता की कोई जानकारी नहीं थी, जिससे पूरा परिवार गहरी निराशा में डूब गया था। ऐसे कठिन समय में आरबीएसके (RBSK) योजना उनके लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई।
आशा कार्यकर्ता और आरबीएसके टीम का मिला सहयोग
क्षेत्रीय आशा कार्यकर्ता और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से पीड़ित परिवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त हुई। इसके तुरंत बाद, विकास खंड अछनेरा की आरबीएसके ‘टीम बी’—जिसमें डॉ. लता मिश्रा, डॉ. दीप्ति बरूण, संतोष कुमार (ऑप्टोमेट्रिस्ट) और अनीता कौशिक (एएनएम) शामिल थीं—ने बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
आरबीएसके टीम ने परिजनों को सरकार द्वारा संचालित इस महत्वूपर्ण योजना की पूरी प्रक्रिया समझाई, जिससे परिवार में बच्ची के ठीक होने की एक नई किरण जगी। इसके बाद, जनपद स्तर से डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा के सक्रिय सहयोग से बच्ची को अलीगढ़ के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में रेफर (संदर्भित) किया गया।
पूरी तरह निशुल्क हुई सर्जरी
जेएन मेडिकल कॉलेज में बच्ची की सभी आवश्यक और महंगी जांचें पूरी तरह निःशुल्क कराई गईं। इसके बाद, 30 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा लविश्का की अत्यंत सफलतापूर्वक और पूरी तरह निःशुल्क सर्जरी संपन्न की गई। उपचार का पूरा वित्तीय खर्च सरकार द्वारा वहन किया गया, जिसके कारण इस कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार को एक रुपये का भी आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा।
सफल ऑपरेशन के बाद बच्ची के पिता गजेंद्र पाल सिंह और अन्य परिजनों ने आरबीएसके टीम तथा स्वास्थ्य विभाग का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान और इस योजना के तहत मिले मुफ्त उपचार ने उनकी बेटी को नया जीवन दिया है।
क्या है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK)?
इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि यह भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चलाई जाने वाली एक अति महत्वपूर्ण योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान करना और उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित करना है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से 4 श्रेणियों (जन्मजात दोष, कमियां, बीमारियां और शारीरिक विकास में देरी व विकलांगता) के अंतर्गत आने वाली 47 प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों और बीमारियों की जांच करता है। इसमें संपूर्ण उपचार व दवाइयों का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है।
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर समर्पित आरबीएसके टीमें (जिनमें आयुष डॉक्टर, एएनएम और फार्मासिस्ट होते हैं) नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा करती हैं। वहां बच्चों की स्क्रीनिंग करके इन गंभीर रोगों से पीड़ित बच्चों की समय रहते पहचान की जाती है और उन्हें उपचार के लिए उच्च संस्थानों में भेजा जाता है।
डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जनपद आगरा में इस कार्यक्रम के तहत जन्मजात व गंभीर रोगों से जूझ रहे बच्चों को लगातार जीवनदान मिल रहा है। इसके तहत वर्ष 2025-26 में 152 बच्चों और वर्ष 2026-27 में अब तक 76 बच्चों को सफल उपचार उपलब्ध कराया जा चुका है। यह योजना न केवल मासूमों का जीवन बचा रही है, बल्कि समाज के गरीब और बेसहारा परिवारों को एक नई उम्मीद भी दे रही है।
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