यश ढुल जल्द से जल्द घर लौटकर अंडर-19 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी अपने दादा जगतसिंह की तस्वीर के सामने रखना चाहते हैं। उनके करियर को बनाने में दादा का अहम किरदार रहा है। ढुल को बचपन की वह बातें याद हैं कि कैसे उनके दादा ने उनकी प्रतिभा को पहचान कर उन्हें अकादमी लेकर गए।
यश के दादा सेना में कार्यरत थे। उन्होंने अपने पोते को समर्पण और अनुशासन जैसे गुण बहुत कम उम्र में ही सिखाए। उन्होंने ही उन्हें क्रिकेटर बनने के लिए प्रेरित किया। यश जब नौ साल के थे, जगत सिंह उन्हें दिल्ली के द्वारका स्थित बाल भवन स्कूल में ले गए और उन्हें कोच राजेश नागर से मिलवाया।
यश ने बताया, ‘वर्ल्ड कप जीत मेरे दादा को समर्पित है। मैं आज जो भी हूं उनकी वजह से हूं। वह रोजाना मेरे साथ जाते थे। वह मुझे अकादमी छोड़ने और लेने आते। उन्होंने मेरी क्रिकेट किट और बैग उठाया। अगर मुझे क्रिकेट के किसी सामान की जरूरत होती तो वह मुझे लाकर देते। वह सबसे पहले इंसान थे जिन्होंने मेरी प्रतिभा को पहचाना और मुझे अकादमी लेकर गए। उन्होंने ही मुझे राजेश सर से मिलवाया।’
उन्होंने मुझे कहा, ‘काश कि वह आज मेरे साथ होते और मुझे ट्रॉफी के साथ देखते। मैं यह वर्ल्ड कप अपने दादा को समर्पित करता हूं। मुझे पूरा यकीन है कि वह मुझे देख रहे होंगे। मैं यह ट्रॉफी उनकी तस्वीर के सामने यह ट्रॉफी रखकर उनका आशीर्वाद लेना चाहता हूं।’
ढुल अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाले पांचवें भारतीय कप्तान बने। उनसे पहले मोहम्मद कैफ (2000), विराट कोहली (2008), उन्मुक्त चंद (2012) और पृथ्वी साव (2018) ने आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता था। भारत ने इंग्लैंड को चार विकेट से हराकर खिताब पर कब्जा किया। भारत ने एंटीगा के सर विवियन रिचर्ड्स स्टेडियम पर ट्रॉफी उठाई।
-एजेंसियां
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