छह घंटे की मैराथन बैठक से मिले बड़े संकेत, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चल रहा मुकदमा
आलोक कुमार ने आगरा आगमन की विश्व हिंदू परिषद नेताओं को नहीं दी कोई जानकारी
डॉ भानु प्रताप सिंह
आगरा। राम मंदिर निर्माण के साथ अयोध्या आंदोलन का लक्ष्य पूरा होने के बाद अब विश्व हिंदू परिषद ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा को अपना अगला बड़ा अभियान बनाने की तैयारी तेज कर दी है। आगरा में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) सुरेंद्र कुमार गुप्ता एडवोकेट के साथ करीब छह घंटे तक मैराथन बैठक कर न्यायालय में लंबित श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण की कानूनी रणनीति पर विस्तार से मंथन किया। बैठक में यह भी स्पष्ट संकेत मिले कि आने वाले समय में यह लड़ाई केवल अदालत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर जनजागरण के स्तर पर भी आगे बढ़ाई जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राम मंदिर के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर फोकस
राम मंदिर आंदोलन के दौरान देशभर में गूंजा नारा—”अयोध्या हुई हमारी है, अब काशी-मथुरा की बारी है”—एक बार फिर चर्चा में है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद विश्व हिंदू परिषद ने अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा से जुड़े कानूनी संघर्ष को गति देने की रणनीति बनाई है। इस दिशा में संगठन ने आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार गुप्ता की भूमिका को महत्वपूर्ण माना है।
आगरा में छह घंटे की मैराथन बैठक
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार आगरा में पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) सुरेंद्र कुमार गुप्ता एडवोकेट के निवास पर पहुंचे। उनके साथ सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता भक्तिवर्धन तथा वरुण माहेश्वरी भी मौजूद रहे। बैठक में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा से संबंधित मुकदमे के सभी कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। यह मैराथन वार्ता लगभग छह घंटे तक चली।
मथुरा केस के शीघ्र निस्तारण पर जोर
बैठक के दौरान सुरेंद्र कुमार गुप्ता एडवोकेट ने उच्च न्यायालय में विचाराधीन मुकदमे के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। आलोक कुमार ने अपेक्षा व्यक्त की कि इस मुकदमे के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए। उनका कहना था कि काशी विश्वनाथ मंदिर से संबंधित प्रकरण से पहले भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा के मुकदमे का निर्णय संभव हो सकता है।
वाद संख्या 17/2023 को मिली प्रतिनिधित्व वाद की मान्यता
आलोक कुमार ने कहा कि सुरेंद्र गुप्ता एडवोकेट द्वारा दायर वाद संख्या 17/2023 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 जुलाई 2025 के आदेश के माध्यम से सम्पूर्ण हिन्दू समाज की ओर से दायर प्रतिनिधित्व वाद माना है। साथ ही इसे सम्पूर्ण मुस्लिम समाज के विरुद्ध घोषित किया गया है। उच्च न्यायालय में विचाराधीन कुल 19 वादों में केवल इसी वाद को प्रतिनिधित्व वाद के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। उनके अनुसार अब यह मुकदमा सम्पूर्ण हिन्दू समाज का प्रतिनिधित्व करता है।
विश्व हिंदू परिषद ने सहयोग का दिया भरोसा
आलोक कुमार ने कहा कि इस मुकदमे में विश्व हिंदू परिषद से जो भी अपेक्षा होगी, संगठन अपनी ओर से सलाह और सहयोग उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिन्दू संगठन और प्रत्येक हिन्दू का दायित्व है कि वह इस मुकदमे में अपना भावनात्मक सहयोग और आशीर्वाद प्रदान करे।
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को बनाया जाएगा पक्षकार
सुरेंद्र गुप्ता एडवोकेट ने जानकारी दी कि संबंधित प्रकरण में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को वक्फ अधिनियम की धारा 89 के अंतर्गत नोटिस तामील कराया जा चुका है, लेकिन अब तक बोर्ड की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि अब इस वाद में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को भी पक्षकार बनाया जाएगा।
हाईकोर्ट में स्वयं बहस करने की अपेक्षा
आलोक कुमार ने सुरेंद्र गुप्ता एडवोकेट से अपेक्षा की कि वे यथासंभव प्रत्येक महत्वपूर्ण तारीख पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर हिन्दू समाज की ओर से बहस करें।
सुप्रीम कोर्ट में भी तेजी लाने के निर्देश
आलोक कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता भक्तिवर्धन से कहा कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन अपील के शीघ्र निस्तारण के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश्वरन जी के साथ आवश्यक प्रयास किए जाएं।
अभिलेख जुटाने की जिम्मेदारी
बैठक में अधिवक्ता वरुण माहेश्वरी तथा गोकुलेश गौतम को निर्देश दिए गए कि वे सुरेंद्र गुप्ता एडवोकेट द्वारा बताए गए मुकदमे से संबंधित सभी आवश्यक अभिलेखों को शीघ्र एकत्रित करें, ताकि कानूनी प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जा सके।
व्यक्तिगत रुचि से करेंगे सहयोग
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि वे स्वयं भी इस पूरे प्रकरण में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए समय-समय पर अपना मार्गदर्शन, सलाह और सहयोग प्रदान करते रहेंगे।
संपादकीय: अदालत की चौखट पर अगला बड़ा धार्मिक विवाद
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद यह स्वाभाविक था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ से जुड़े विवाद राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आएंगे। आगरा में हुई यह बैठक संकेत देती है कि विश्व हिंदू परिषद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की रणनीति बना रही है। कानूनी स्तर पर प्रतिनिधित्व वाद की मान्यता मिलना इस मुकदमे को नई दिशा देने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि भारत का संविधान और न्यायपालिका ऐसे सभी विवादों के समाधान का एकमात्र वैधानिक माध्यम हैं। किसी भी धार्मिक या ऐतिहासिक विवाद का अंतिम समाधान न्यायालय के निर्णय से ही निकलना चाहिए। लोकतंत्र में भावनाओं का सम्मान आवश्यक है, लेकिन कानून का शासन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह घटनाक्रम आने वाले समय में चर्चा का विषय रहेगा। अयोध्या आंदोलन ने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी थी। अब मथुरा का मुद्दा किस प्रकार सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करेगा, यह भविष्य तय करेगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा कानूनी संघर्ष अब नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है।
न्यायपालिका के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह संवैधानिक मूल्यों, ऐतिहासिक तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय दे, जिससे कानून के शासन पर देश का विश्वास और मजबूत हो। वहीं सभी पक्षों का दायित्व भी है कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें और सामाजिक सौहार्द बनाए रखें। यही भारतीय लोकतंत्र और संविधान की वास्तविक शक्ति है।
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