अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आई है। मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में चौतरफा दबाव के बीच, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया है।
इस्तीफे की पटकथा और हरिद्वार कनेक्शन
सूत्रों का दावा है कि इस इस्तीफे की पटकथा 8 दिन पहले हरिद्वार में लिखी गई थी। 18 और 19 जून को हरिद्वार में विश्व हिंदू परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें अयोध्या से चंपत राय और गोपाल राव भी शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने राम मंदिर चढ़ावे के हिसाब-किताब में हुई हेराफेरी को लेकर उनसे कड़ी जवाब-तलब की थी। इस बैठक के बाद से ही चंपत राय पर नैतिक और संगठनात्मक दबाव लगातार बढ़ता गया।
सीएम योगी के दौरे से बढ़ी दूरियां
19 जून को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या दौरे पर थे, तब से ही संकेत मिलने लगे थे कि ट्रस्ट के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। सीएम के कार्यक्रमों में चंपत राय की अनुपस्थिति को उनकी बढ़ती राजनीतिक और संगठनात्मक दूरी के तौर पर देखा गया। इसके बाद गुरुवार की रात भर संघ और विहिप के वरिष्ठ नेताओं के फोन आने का सिलसिला चलता रहा, जिसमें मामला शांत करने के लिए ‘इस्तीफे’ को ही एकमात्र रास्ता बताया गया।
चढ़ावा चोरी और जांच का दबाव
7 जून को सामने आए चढ़ावा चोरी के मामले ने ट्रस्ट की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे। SIT की प्रारंभिक जांच में दान और प्रबंधन से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। स्थिति तब और अधिक जटिल हो गई जब FIR में चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष का नाम सामने आया। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने भी इसे ‘बड़े लोगों को बचाने’ की साजिश करार दिया था, जिससे सरकार और संगठन की किरकिरी हो रही थी।
अगली राह क्या होगी?
शुक्रवार सुबह पूजा-पाठ के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने मणि रामदासजी की छावनी पहुंचकर अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को अपना इस्तीफा सौंप दिया। फिलहाल इस इस्तीफे को ट्रस्ट की साख बचाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि इस गबन और प्रशासनिक चूक की जांच की आंच और कितने बड़े चेहरों तक पहुँचती है।
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