आगरा। नगर निगम ने विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर एक सराहनीय पहल शुरू की है। आगरा नगर निगम शहर में गौरैया की घटती संख्या को लेकर चिंतित है और इसी दिशा में कदम उठाते हुए उसने गौरैया के लिए कृत्रिम घोंसले बनाने का अभियान शुरू किया है।
घरों पर पड़ने वाले छप्पर में गौरैया घोंसले बनाती थी। अब पक्के मकान बन गए, गौरैया के घोंसले छिन गए। फसलों में कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव, मोबाइल टावरों के रेडिएशन ने भी गौरैया के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को इस प्यारी चिड़िया की घटती संख्या के बारे में जागरूक किया जा सके। और इसे बचाने के लिए प्रेरित किया जाए।
आगरा नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने भी आज इस अनूठी पहल की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में चिन्हित स्थानों पर कृत्रिम घोंसले लगाए जाएंगे ताकि गौरैया को रहने और प्रजनन करने के लिए सुरक्षित स्थान मिल सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में गौरैया के संरक्षण को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने शहरवासियों से भी अपील की कि वे अपने घरों की छतों पर गौरैया के लिए अनाज और पानी रखें। छोटी-छोटी कोशिशों से भी गौरैया के संरक्षण में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।
नगर निगम का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाता है। गौरैया, जो कभी हमारे आंगन और आसपास आसानी से दिख जाती थी, अब शहरीकरण और प्रदूषण के कारण विलुप्त होने के कगार पर है। नगर निगम की यह पहल निश्चित रूप से गौरैया की आबादी को स्थिर करने और बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
शहर के पर्यावरणविदों और पक्षी प्रेमियों ने नगर निगम की इस पहल की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि यह अभियान लोगों को भी गौरैया के संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा।
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