Agra, Uttar Pradesh, India. उत्तर प्रदेश ने 25 करोड़ 21 लाख पौधे रोपकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सात नवम्बर, 2016 को ‘ग्रीन यूपी, क्लीन यूपी’ अभियान के तहत पूरे प्रदेश में 24 घंटे में 5 करोड़ पौधे लगाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया था। चार जुलाई, 2021 को 25.21 करोड़ पौधे लगाकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह रिकॉर्ड तोड़ दिया। साथ ही मुख्यमंत्री ने 100 करोड़ वां पौधा रोपकर भी एक रिकॉर्ड बनाया है।
जहां तक पौधारोपण की बात है तो उत्तर प्रदेश में हर साल करोड़ों पौधे लगते हैं। 2017-18 में 5.71 करोड़, 2018-19 में 11.77 करोड़, 2019-20 में 22.60 करोड़, 2020-21 में 25.87 करोड़ पौधे लगाए गए। 2021-22 में 30 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। 25 करोड़ पौधे तो एक दिन में ही लगाए जा चुके हैं। पिछले चार साल में 91.60 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश की आबादी अनुमानित आबादी 24.1 करोड़ है। यानी पिछले चार साल में 3.79 पौधे प्रति व्यक्ति लगाए जा चुके हैं। राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के 33.3 फीसद भू-भाग पर वन होना चाहिए लेकिन वर्तमान में लगभग 19.39 भू-भाग पर ही वन है। उत्तर प्रदेश में तो यह सिर्फ 6.09 प्रतिशत (16.582 वर्ग किमी.) है। यह अत्यंत चिन्ताजनक स्थिति है।
न्यूनतम वन क्षेत्रफल वाले पांच जिलों में प्रधानमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी और मैनपुरी भी शामिल है। ये है- संत रविदास नगर (3 वर्ग किमी), मऊ (11 वर्ग किमी.), संत कबीर नगर (14 वर्ग किमी), मैनपुरी (14 वर्ग किमी), वाराणसी (17 वर्ग किमी.)।
सवाल यह है कि आखिर लगाए गए पौधे कहां जा रहे हैं? क्या ये वास्तव में लगाए जा रहे हैं या सिर्फ रिकॉर्ड बनाया जा रहा है? वन महोत्सव 1950 में शुरू हुआ था। तब से लगातार पौधारोपण किया जा रहा है। अगर ये सभी पौधे जीवित रहते तो भारत में 50 फीसदी भूभाग पर आज पेड़ होते। प्राकृतिक रूप से इतनी ऑक्सीजन होती कि कोरोना महामारी की घातकता न्यून हो जाती।
हम सब जानते हैं कि वनों से अनेक प्रकार के लाभ हैं। पेड़ों से पर्यावरण शुद्ध होता है। बाढ़ से रक्षा होती है। बारिश अच्छी होती है। भूमि उपजाऊ होती है। जीव-जन्तुओं का संरक्षण होता है जो पारिस्थितिकी संतुलन के लिए आवश्यक है। माचिस, प्लाईवुड, कत्था, बेंत, फर्नीचर, कागज, लकड़ी के खिलौने, खेल का सामान जैसे उद्योग पेड़ों पर निर्भर हैं।
अच्छी बात यह है कि इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने वनों को प्राथमिकता दी है। उत्तर प्रदेश सरकार कोरोना महामारी में जान गंवाने वालों की स्मृति में हर गांव में स्मृति वन बनाएगी। लोगों को जड़ी बूटियां आसानी से उपलब्ध हो सकें, इसके लिए कौशल वाटिकाएं स्थापित की जाएंगी। कोरोना के बाद गिलोय की महत्ता बढ़ी है। 100 वर्ष से पुराने पेड़ों का सरकार संरक्षण कर रही है। आशा की जानी चाहिए कि सरकार इन घोषित योजनाओं को पूरा करेगी।
हमें नहीं भूलना चाहिए कि वन भी देश और प्रदेश को राजस्व देते हैं। उससे भी बड़ी बात यह है कि हमें जीवन देते हैं। प्राणवायु का प्राकृतिक स्रोत सिर्फ पेड़-पौधे हैं। इसलिए इन्हें परिवार का सदस्य मानकर सेवा और संरक्षण करना चाहिए।
नितेश शर्मा
संपादक, जनसंदेश टाइम्स
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