​डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्रों का फूटा गुस्सा: परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी को लेकर परीक्षा नियंत्रक कार्यालय पर प्रदर्शन

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आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणामों में लगातार सामने आ रही गंभीर गड़बड़ियों और विसंगतियों के चलते बुधवार को विद्यार्थियों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। बीए और बीए-एलएलबी के सैकड़ों विद्यार्थियों ने परीक्षा नियंत्रक कार्यालय पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनरत छात्रों को जब संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं मिले, तो उनका आक्रोश और बढ़ गया।

नाराज छात्र कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान आक्रोशित विद्यार्थियों ने कार्यालय के गेट पर ‘परीक्षा नियंत्रक लापता हैं’ लिखे हुए पोस्टर भी चस्पा कर दिए। करीब दो घंटे तक चले इस हंगामेदार प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने परीक्षा परिणामों को दुरुस्त करने और लंबित रिजल्ट तत्काल जारी करने की पुरजोर मांग उठाई।

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणामों से जुड़ी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन उनका समय पर समाधान नहीं किया जा रहा है। कहीं घोषित परिणाम में विद्यार्थियों के अंक कम होने की शिकायत है तो कहीं परीक्षा देने के बावजूद अनुपस्थित दर्शाया जा रहा है। कई छात्रों के परिणाम अब तक लंबित हैं, जबकि अगले सेमेस्टर का रिजल्ट भी जारी किया जा चुका है। इन विसंगतियों के कारण विद्यार्थियों के सामने अगली कक्षा में प्रवेश, पढ़ाई और शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।

दोबारा रिजल्ट जारी होने पर 10 से 15 नंबर घटाने का आरोप

छात्र नेता अंकुश गौतम ने बीए-एलएलबी के परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि हाल ही में जारी परिणाम को लेकर विद्यार्थियों में असंतोष है। छात्रों का आरोप है कि पहले घोषित रिजल्ट में कई विद्यार्थियों को प्रमोट दिखाया गया था, लेकिन दोबारा परिणाम जारी होने पर उनके 10 से 15 अंक तक कम कर दिए गए। इसके चलते कुछ विद्यार्थी फेल हो गए। विद्यार्थियों का कहना है कि परिणाम में इस तरह का बदलाव उनके भविष्य पर असर डाल सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि पहले और बाद में जारी किए गए परिणामों का मिलान कराया जाए। अंकों में अंतर आने के कारणों की जांच कराई जाए और यदि मूल्यांकन या परिणाम तैयार करने में कोई त्रुटि हुई है तो उसे तत्काल ठीक किया जाए। बीए के विद्यार्थियों ने भी परिणामों में इसी तरह की गड़बड़ियों की शिकायत की। छात्रों का कहना था कि अलग-अलग बैच के नतीजों में विसंगतियां सामने आ रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

चौथे सेमेस्टर का रिजल्ट जारी, तीसरे का अब भी इंतजार

बीए 2024 बैच के विद्यार्थियों ने परिणामों के क्रम को लेकर सवाल उठाए। छात्रों के मुताबिक, उनके तृतीय सेमेस्टर का परिणाम अब तक जारी नहीं किया गया है, जबकि चतुर्थ सेमेस्टर का रिजल्ट घोषित हो चुका है। विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने के बावजूद कई छात्रों को अलग-अलग विषयों में अनुपस्थित दर्शा दिया गया है। छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने परीक्षा दी है तो परिणाम में अनुपस्थित दर्ज किया जाना गंभीर समस्या है। इससे उनके अंक और परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। छात्रों ने मांग की कि परीक्षा में उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जाए। उत्तर पुस्तिकाओं और परीक्षा संबंधी दस्तावेजों की जांच कराकर पात्र विद्यार्थियों के परिणामों में सुधार किया जाए, ताकि किसी छात्र को विश्वविद्यालय की कथित लापरवाही का खामियाजा न भुगतना पड़े।

बीए 2025 बैच का पहला सेमेस्टर लंबित, दूसरे का रिजल्ट जारी

बीए 2025 बैच के विद्यार्थियों ने भी परीक्षा परिणामों को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि प्रथम सेमेस्टर का परिणाम अभी तक घोषित नहीं किया गया है, जबकि द्वितीय सेमेस्टर का रिजल्ट जारी हो चुका है। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने घोषित परिणाम में गलत सीजीपीए दर्ज होने और अन्य त्रुटियों की शिकायत की। छात्रों के अनुसार, परिणाम में गड़बड़ी होने से उन्हें अपनी शैक्षणिक स्थिति स्पष्ट करने में परेशानी हो रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को लंबित नतीजे जारी करने के साथ-साथ घोषित परिणामों की भी जांच करनी चाहिए। विद्यार्थियों ने मांग की कि परिणाम संबंधी समस्याओं के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए, ताकि छात्रों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए बार-बार विश्वविद्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।

1100 रुपये खर्च करने के बाद भी NQ, छात्रों ने उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान सह-पाठ्यक्रम परीक्षा के परिणामों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विद्यार्थियों के मुताबिक, बीए 2024 बैच के कई छात्रों को पहले सह-पाठ्यक्रम परीक्षा के परिणाम में NQ यानी ‘नॉट क्वालिफाइड’ दिखाया गया था। छात्रों का आरोप है कि परिणाम में सुधार की उम्मीद के साथ दोबारा परीक्षा देने के लिए प्रति विद्यार्थी 1100 रुपये जमा कराए गए। इसके बावजूद नया परिणाम जारी होने पर भी कई विद्यार्थियों के रिकॉर्ड में NQ ही दर्ज है। इसको लेकर विद्यार्थियों ने सवाल उठाया कि जब दोबारा परीक्षा कराई गई और छात्रों ने निर्धारित शुल्क जमा किया तो परिणाम में सुधार क्यों नहीं हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराने, दोबारा परीक्षा के रिकॉर्ड का सत्यापन करने और पात्र विद्यार्थियों के परिणाम दुरुस्त करने की मांग की। साथ ही पुनः परीक्षा के लिए जमा कराई गई फीस के मामले में भी उचित कार्रवाई की मांग उठाई।

दो घंटे तक धरना, छात्रों ने की जल्द समाधान की मांग

परीक्षा नियंत्रक कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी समस्याओं को लेकर नारेबाजी की। अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर छात्रों ने नाराजगी जताई और कार्यालय के गेट पर ‘परीक्षा नियंत्रक लापता हैं’ लिखे पोस्टर चस्पा कर दिए। करीब दो घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने परीक्षा परिणामों से जुड़ी सभी शिकायतों के समाधान की मांग की। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना था कि परीक्षा परिणामों में देरी और कथित गड़बड़ियों के कारण उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। गलत अंक, अनुपस्थिति का गलत रिकॉर्ड, लंबित रिजल्ट और दोबारा परीक्षा देने के बाद भी NQ दर्ज रहने जैसी समस्याओं पर विश्वविद्यालय को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

छात्रों ने मांग की कि बीए और बीए-एलएलबी के सभी संबंधित परिणामों की जांच कराई जाए, गलत अंकों और सीजीपीए को ठीक किया जाए, लंबित परिणाम जल्द घोषित किए जाएं और पुनः परीक्षा शुल्क से जुड़े मामले में उचित निर्णय लिया जाए। अब विद्यार्थियों की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। छात्रों की प्रमुख मांग है कि उनकी शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से किया जाए, ताकि परिणाम संबंधी अनिश्चितता खत्म हो और किसी भी विद्यार्थी का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो।

Dr. Bhanu Pratap Singh