क्षत्रियों ने ब्राह्मणों को दान में दी है भागवत कथाः संजय शास्त्री जी महाराज अंतरराष्ट्रीय कथावाचक

RELIGION/ CULTURE

भागवत कथा के दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय भागवत प्रवक्ता ने जी जीवनोपयोगी सीख

शास्त्रीपुरम के ए ब्लॉक स्थित ट्यूबवेल वाले पार्क में कथा का दूसरा दिन

7 जनवरी को बावन भगवान का अवतार की कथा का श्रवण करें

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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.  शास्त्रीपुरम ए ब्लॉक के ट्यूबवेल वाले पार्क में चल रही श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे नजर आए। व्यासपीठ पर विराजमान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक संजय शास्त्री जी महाराज ने अनेक जीवनोपयोगी बातें कथा के बीच में बताईं। उन्होंने फिर राजा परीक्षित, सुखदेव महाराज आदि की कथा सुनाकर भक्तों को निहाल किया। कहा कि गली गली भागवत कथा करने वाले घूम रहे हैं। आज कोई भी बैठ जाता है कथा करने के लिए। कथा तो ब्राह्मणों के लिए है जो क्षत्रियों ने दान में दी है। भागवत कथा के मुख्य यजमान मनोज कुमार शर्मा एवं श्रीमती पूनम शर्मा (दोनों प्रधानाध्यापक) हैं।

श्री संजय शास्त्री महाराज ने जीवन का सार इन पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त किया

 जीवन में जी भर देख लिया आराम तो है पर चैन नहीं,

जीवन में साथ तो हजारों हैं पर विपत्ति पड़े तो कोई नहीं।

अंतराष्ट्रीय कथावाचक कथावाचक संजय शास्त्री जी महाराज

फिर उन्होंने कहा कि जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो ईश्वर का रास्ता खुला रहता है। भगवान बड़े कृपालु हैं, तुमसे पहले तुम्हारे रास्ते को क्लियर कर देते हैं। जो ईश्वर चाहता है, वही होता है। भगवान ने पांडवों के स्थान पर द्रौपदी के पांच पुत्र सुला दिए थे। वे पांडवों को बचाना चाहते थे।

राष्ट्रीय कवि रविंद्र दंडोतिया कविता सुना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब तप की शक्ति भगवान से जुड़ जाती है तो सुख-दुख समाप्त हो जाता है। ज्ञान से बढ़कर कुछ नहीं है क्योंकि ज्ञान का हिस्सा कोई नहीं कर सकता। कलयुग में सतयुग द्वापर, त्रेता का आनंद लेने वाला ही भक्त है। हर युग में चारों युग रहते हैं। जहां भागवत कथा, वहां त्रेता, द्वापर और सतयुग है।

भागवत कथा में नृत्य करतीं श्रद्धालु।

अंतरराष्ट्रीय कथावाचक संजय शास्त्री जी महाराज ने कहा कि भगवान का नाम लेने से सर्दी भाग जाती है। हमें कथा के समय ठंड नहीं लगती क्योंकि हरि भजन में ठंड का प्रभाव नहीं होता है। कुंभ में अनेक संत वस्त्र नहीं पहनते हैं।

उन्होंने कहा कि कथा सुनते समय श्रोता बनकर रहिए। क्रोध, अहंकार की छोड़कर, भिक्षुक बनकर आया करो। कथा में टाइमपास करने नहीं आओ। श्रोता ही वक्ता से कथा सुन सकता है, श्रोता सुनने वाला होना चाहिए। भगवान को मिठाई, फल से लेना देना नहीं है। भगवान भाव देखते हैं।

भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।

अंतरराष्ट्रीय कथावाचक संजय शास्त्री जी ने सूचना दी कि कथा का समय दोपहर 12 से शाम चार बजे तक का है। समय पर पधारें। प्रातःकाल हवन का समय 8 बजे का है। 7 जनवरी को बावन भगवान का अवतार की कथा है।

भागवत कथा में नृत्यु करते श्रद्धालु।

 

 

Dr. Bhanu Pratap Singh