भारतीय समाज में मासिक धर्म अभी तक कलंकित क्यों?

प्रियंका सौरभ भारत के पास मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति अधिक समावेशी और दूरदर्शी दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए सांस्कृतिक विचारों का सम्मान करने का अवसर है। आपके क्या विचार हैं-क्या सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, या जमीनी स्तर के संगठनों को बदलाव लाने में आगे आना चाहिए? मासिक धर्म से जुड़ा कलंक कई […]

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महिला दिवस विशेष: अपनी मंज़िल के लिए अपनी राहें चुनती महिलाएँ…

प्रियंका सौरभ आज, लड़कियाँ उच्च शिक्षा और कौशल विकास में लड़कों के बराबर शैक्षिक उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं, 50% से अधिक युवतियाँ कक्षा 12 तक की पढ़ाई पूरी कर रही हैं और 26% कॉलेज की डिग्री प्राप्त कर रही हैं। युवा महिलाएँ विभिन्न प्रकार के करियर विकल्पों और डिजिटल कौशल प्लेटफ़ॉर्म की उपलब्धता से […]

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महिला दिवस विशेष: सबरी से द्रौपदी मुर्मू तक का सफर…

प्रियंका सौरभ भारतीय संस्कृति स्त्री शक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। शक्ति को इस पूजा के एक मूलभूत पहलू के रूप में मनाया जाता है। प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति में कहा गया है, “जहाँ भी महिलाओं का सम्मान किया जाता है, वहाँ देवता मौजूद होते हैं,” जो समाज में महिलाओं […]

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मोदी के बाद कौन? बीजेपी की अलिखित रिटायरमेंट पॉलिसी बनी चर्चा का विषय

अगस्त 2014 को भाजपा द्वारा एक प्रेस रिलीज़ जारी कर जानकारी दी गई की 75 वर्ष से अधिक आयु के अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और डॉ मुरली मनोहर जोशी को ससम्मान मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया जा रहा है. कयास लगाए गए कि इन नेताओं का अब सक्रीय राजनीति से वास्ता ख़त्म हो जायेगा […]

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महिला दिवस विशेष: सार्थक भागीदारी के बिना कैसे हल होंगे आधी दुनिया के मसले

अगर आधी आबादी से होते हुए भी महिलाएँ इस आबादी की कहानियाँ नहीं कहेंगी, तो कौन कहेगा? केवल महिला दिवस पर ही नहीं, हर रोज़ महिलाओं को लड़ाई लड़नी पड़ेगी इस बदलाव के लिए, अपने हक़ों के लिए। छोटी शुरुआत ही सही, लेकिन शुरुआत सबको करनी पड़ेगी। ये संघर्ष का सफ़र अंतहीन है। महिलाओं के […]

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बदलती सियासत: सत्ता की जोड़-तोड़ मे जनता के मुद्दे गायब…!

राजनीति में समीकरण हर दिन बदल रहे हैं। बिहार से लेकर दिल्ली और राजस्थान तक, हर जगह नए दावे, नए गठबंधन और पुराने वादों की याद दिलाने की होड़ लगी है। सवाल यह है कि इन सियासी हलचलों के बीच जनता के असली मुद्दे कहां खो जाते हैं? राजस्थान की राजनीति: बदलते समीकरण और जनता […]

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कम नहीं है त्रिभाषा नीति के पालन में आने वाली चुनौतियाँ

प्रियंका सौरभ भारत में भाषा शिक्षा को लेकर चर्चा अभी भी जारी है। तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति के प्रति कड़ा विरोध भाषाई पहचान और केंद्र सरकार की नीतियों के बारे में महत्त्वपूर्ण चिंताओं को उजागर करता है। वास्तविक शैक्षिक सुधार के लिए भाषा शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाना आवश्यक है, न कि केवल नीतिगत ढाँचों […]

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पच्चास साल बाद होने वाली परिसीमन को लेकर चिंताएँ

डॉ सत्यवान सौरभ राजकोषीय संघवाद और संस्थागत ढांचे को मज़बूत करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि राजनीतिक निष्पक्षता जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ मिलीजुली हो, जिससे एक सुसंगत और एकजुट भारत को बढ़ावा मिले। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से नागरिकों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का आकार छोटा होगा और शासन […]

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इन्दिरा गांधी जैसी हिम्मत नहीं दिखा पाए नरेन्द्र मोदी

शकील अख्तर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद खतरनाक शुरूआत कर दी। पूराने राष्ट्रपति ( सरकार) के फैसलों को हम क्यों मानें? ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ हुई दुनिया भर में वायरल बातचीत, जो आखिरी दौर में बातचीत कम हम भारतीयों के हिसाब से सास बहु के झगड़े की तरह […]

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IIT बाबा अभय सिंह के साधु हो जाने पर दोहरा मापदंड क्यों?

न्यूज नेशन के न्यूज रूम में आईआईटियन बाबा अभय सिंह के साथ जो हुआ वह फुहड़ है, घिनौना है, नीचता है। मीडिया को आखिर क्या दिक्कत है उस युवक से? समाज का ऐसा क्या अहित कर दिया है उसने कि यूँ उसे नेशनल टेलीविजन पर अपमानित किया जाय? केवल इतना ही न, कि आई आई […]

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