नतीजों को मिलते पुरस्कार, कोशिशें रहती गुमनाम…
डॉ सत्यवान सौरभ परिणामों पर ज़ोर देने से क्रमिक शिक्षा और सुधार का महत्त्व कम हो जाता है, जिससे सफलता अस्थिर हो जाती है। ऋषभ पंत जैसे क्रिकेटर, जिनकी शुरुआत में असंगतता के लिए आलोचना की गई थी, ने समय के साथ लगातार सुधार करके सम्मान प्राप्त किया। परिणाम-उन्मुख मानसिकता शॉर्टकट या अनैतिक प्रथाओं को […]
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