स्वस्थ लोकतंत्र के लिए एक मज़बूत और रचनात्मक विपक्ष आवश्यक है

प्रियंका सौरभ विपक्ष एक आवश्यक प्रहरी है जो एक समृद्ध लोकतंत्र में सरकार की शक्ति पर नियंत्रण और संतुलन सुनिश्चित करता है। यह विभिन्न दृष्टिकोणों को व्यक्त करने, समाज के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करने तथा सरकार को उसके कार्यों के लिए जवाबदेह बनाने के लिए आवश्यक है। सहिष्णुता, वास्तविक राजनीतिक विरोध, तथा विवादों को […]

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यूपी बोर्ड परीक्षा: नकल का ठेका, शिक्षक की विवशता और प्रशासन की असहायता

यूपी बोर्ड परीक्षा देश की सबसे बड़ी माध्यमिक परीक्षा है, जिसमें लाखों छात्र भाग लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह परीक्षा शिक्षा की गुणवत्ता से अधिक नकल माफियाओं और भ्रष्टाचार के कारण चर्चा में रही है। परीक्षा में नकल कराना अब एक संगठित उद्योग बन चुका है, जिसमें ठेके पर नकल कराई जाती […]

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चिट्ठी: जब काग़ज़ पर धड़कता हो दिल…. जब शब्द ले लेते हैं भावनाओं का आकार

बृजेश सिंह तोमर(वरिष्ठ पत्रकार एवं आध्यात्मिक चिंतक) चिठिया हो तो हर कोई बांचे…! पर हर चिट्ठी सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं होती, कुछ चिट्ठियाँ महसूस करने के लिए लिखी जाती हैं। कुछ शब्द आँखों से नहीं, दिल से पढ़े जाते हैं। जब किसी अपने का लिखा पत्र हाथों में आता है, तो उसमें सिर्फ़ स्याही […]

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अत्यधिक महत्वकांक्षा से टूटती परिवार के रिश्तों की डोर…

बिखर रहे चूल्हे सभी, सिमटे आँगन रोज। नई सदी ये कर रही, जाने कैसी खोज॥ प्रियंका सौरभ पिछले कुछ समय में पारिवारिक ढांचे में काफ़ी बदलाव हुआ है। मगर परिवारों की नींव का इस तरह से कमजोर पड़ना कई चीजों पर निर्भर हो गया है। अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी होना ही रिश्ते टूटने की प्रमुख वज़ह है। […]

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में क्यों नही जा रहा महाकुंभ? अगर आपका भी यही सवाल अपने से है तो ये पढ़े!!

महाकुंभ को लेकर आप भी कहीं FOMO रोग के शिकार तो नहीं! क्या है फ़ोमो? FOMO (Fear of Missing Out) यानी छूट जाने का डर एक मानसिक अवस्था या भावनात्मक प्रतिक्रिया है, जिसमें व्यक्ति को यह चिंता होती है कि वे किसी महत्वपूर्ण, रोचक, या आनंददायक गतिविधि से वंचित हो सकते हैं। FOMO के लक्षण: […]

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युवाओं को लेकर कांग्रेस के संगठात्मक ढांचे में बड़े फेरबदल की जरुरत

भारत जब आजाद हुआ तो कई सारे विकसित देशों खासकर पश्चिम के देशों को लगा कि भारत जैसा इतना बड़ा देश लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चल पाएगा। भारत का लोकतंत्र फेल हो जाएगा और सबसे बड़ा लिखित संविधान भी किसी काम नहीं आएगा। लेकिन इसके उलट आज इतने सालों बाद भारत को एक सफल लोकतांत्रिक […]

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गरीबी: स्थिति या मानसिक सोच?

गरीबी, हमारे देश में एक ऐसी समस्या है, जिसे खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा प्रयास किए गए। इसके लिए हर प्रकार की योजनाएँ, कार्यक्रम और अभियान चलाए गए, फिर भी इस समस्या से छुटकारा नहीं पाया जा सका। इसका एक कारण यह है कि इस समस्या को केवल एक आर्थिक स्थिति मानकर ही इसका […]

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व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी: न्यूज़ से व्यूज बढाने के खेल से आपकी भावनाओं और सोच को कण्ट्रोल करने का तंत्र

आप अपने घर में, परिवार में, या किसी दोस्त के साथ बैठे रहते हैं.. तभी आपके whatsapp पर मैसेज आता है “फलानी जगह, फ़लाने ने फलाने की ह्त्या कर दी, ह्त्या करने वाले का नाम ये था”.. आप नाम देखते हैं, आपका धर्म उस से कनेक्ट करते हैं, और फिर आपका बीपी बढ़ता है.. आप […]

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आगरा को मिलेगा बहुप्रतीक्षित युद्ध स्मारक: नगर निगम की साहसी पहल

बृज खंडेलवाल ताज के शहर आगरा को आखिरकार एक युद्ध स्मारक मिलने जा रहा है। एक ऐसी श्रद्धांजलि, जिसकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। आगरा नगर निगम ने शहर में एक भव्य युद्ध स्मारक बनाकर भारत के वीर सैनिकों के बलिदान का सम्मान करने के अपने निर्णय की घोषणा की है। यह ऐतिहासिक निर्णय नागरिकों […]

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राजनीति में युवाओं की भागीदारी की आवश्यकता

डॉ सत्यवान सौरभ अगर राजनीतिक दल युवाओं को राजनीति में शामिल करने के बारे में गंभीर हैं तो उन्हें कई तरह के कदम उठाने होंगे। पहला कदम सरकार द्वारा युवा मानदंड में बदलाव करना होगा। आज 34-35 वर्ष की आयु के लोगों को भी युवा माना जाता है। इस मानदंड को कम करने की आवश्यकता […]

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