गणतंत्र के 76 साल: हमने क्या खोया और क्या पाया

डॉ सत्यवान सौरभ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से भारत ने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की है। भारत ने साहित्य, खेल, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत ने अपनी विविध संस्कृति को संरक्षित करते हुए उसे गहरा अर्थ दिया है। भारत विकास में आगे बढ़ गया है। सामाजिक, राजनीतिक, […]

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रील युग मे संस्कृति का सन्देश: वायरल गर्ल्स – अश्लीलता पर भारी “मोनालिसा” की सादगी

बृजेश सिंह तोमर(वरिष्ठ पत्रकार एवं आध्यात्मिक चिंतक) रील युग में लाइक्स, फॉलोअर्स और व्यूज के लिए किसी भी हद तक जाने की होड़ मची हुई है!अश्लीलता, दिखावे और ऊटपटांग कंटेंट के जरिए सेलिब्रिटी बनने का सिलसिला मानो आज की डिजिटल संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गया है। लेकिन इसी संस्कृति के बीच जब कोई सादगी […]

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गंभीर चिंता का विषय: जीवन-मृत्यु का प्रश्न बनती कोचिंग के बोझ तले पढाई

डॉ सत्यवान सौरभ स्कूली पढाई के बजाय कोचिंग के भयावह दौर में, छात्रों में आत्महत्या की प्रकृति और प्रवृत्ति का नए सिरे से अध्ययन करने की भी बहुत सख्त ज़रूरत है, क्योंकि देश की पूरी युवा बौद्धिक संपदा दांव पर लगी हुई है, जिसके दूरगामी गंभीर नतीजे पूरे राष्ट्र के माथे पर गहरा सिकन ला […]

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डॉक्टर और कंपनियों का मायाजाल: दवाओं की कीमत में उछाल, डॉक्टर बनवाते ब्रांड, 38 रुपए की दवा की एमआरपी 1200 रुपए

प्रियंका सौरभ नियमों में कहा गया है कि केवल प्रिस्क्रिप्शन वाली दवा और ओवर-द-काउंटर दवा के प्रकार जो केवल फ़ार्मेसियों में बेचे जा सकते हैं, उन्हें सभी फ़ार्मेसियों में बिल्कुल एक ही क़ीमत पर बेचा जाना चाहिए। इसलिए, की दवाओं की कीमतें फ़ार्मेसियों के बीच उतार-चढ़ाव नहीं करती हैं, जिसका अर्थ है कि इससे कोई […]

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विधानसभा चुनावः दिल्ली किसकी ! ‘घमंड, अहंकार और दंभ का रण’

अरविंद सिंह संपादक nni समाचार पत्र आप’ दिल्ली में हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, तो भाजपा सत्ता विरोधी लहर, शीश महल, भ्रष्टाचार के आरोप को आधार बनाकर उसे रोकना चाहती है। कांग्रेस अपनी खोई जमीन को पाने की जद्दोजहद में जुटी है। सबसे दिलचस्प एवं रोमांचक इस चुनाव में देखना है दिल्ली की जनता […]

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सड़कों और फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण ने किया ताजनगरी आगरा को अस्त-व्यस्त, पर्यटन और व्यापार के लिए खतरा

बृज खंडेलवाल आगरा की सड़कों और फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण ने शहर के बुनियादी ढांचे को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सदर बजार से लेकर बेलनगंज, हॉस्पिटल रोड और पालीवाल पार्क तक, सड़कों पर विक्रेताओं और फेरीवालों ने फुटपाथों पर कब्जा कर लिया है, जिससे पैदल चलने वालों को व्यस्त सड़कों पर चलने के लिए मजबूर […]

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महिला सशक्तिकरण की दौड़ जीतती भारतीय रेलवे

प्रियंका सौरभ कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियुक्तियों के नवीनतम दौर के साथ पहली बार रेलवे बोर्ड में महिलाएँ ड्राइवर की सीट पर हैं। कांच की छत को तोड़ते हुए, रेलवे बोर्ड का नेतृत्व पहले से ही एक महिला द्वारा किया जा रहा है, अब संचालन और व्यवसाय विकास के प्रभारी एक महिला सदस्य हैं और उसी […]

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आखिर प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा का कारण क्या है? 

डॉ सत्यवान सौरभ आंकड़ों के अनुसार, जो लोग आजीविका की तलाश में स्थानीय और क्षेत्रीय सीमाओं के पार जाते हैं, उन्हें अपने मेजबान समाज में स्थायी रूप से बाहरी समझे जाने का अपमान सहना पड़ता है। श्रमिकों को अक्सर टेलीविजन स्क्रीन पर दुखद घटनाओं के पात्र के रूप में दिखाया जाता है, जिससे उनके योगदान […]

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घटते छात्र, बढ़ते स्कूल: क्या शिक्षा नहीं अनुकूल?

सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन छात्रों का नामांकन घट रहा है। हरियाणा में साल 2023-24 में सरकारी स्कूलों में नामांकन 22.30 लाख रहा, जो साल 2022-23 के 24.64 लाख से कम है। साथ ही, साल 2023-24 में राज्य में कुल नामांकन 56.41 लाख रहा, जबकि साल 2022-23 में यह 57.76 लाख था।साल […]

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घटती बेटियां: कोख में ही छीन रहें साँसें, फिर संकट में हरियाणा की ‘सुकन्या समृद्धि’

प्रियंका सौरभ हरियाणा में 2024 में लिंगानुपात आठ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात 2024 में गिरकर 910 हो गया है, जो 2016 के बाद सबसे कम है, जब यह अनुपात 900 था। राज्य ने कभी भी डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित आदर्श लिंगानुपात 950 को हासिल नहीं […]

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