युद्ध से युद्धविराम तक: भारत-पाक रिश्तों की बदलती तस्वीर

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार 10 मई 2025 को, भारत और पाकिस्तान ने एक पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की, जो हाल के वर्षों में सबसे गंभीर संघर्ष के बाद हुआ। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सैन्य तनाव बढ़ा था। अमेरिकी राष्ट्रपति की मध्यस्थता […]

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पेआउट पत्रकारिता: अभिव्यक्ति की आज़ादी या एजेंडा मार्केटिंग?

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार सोशल मीडिया पर ‘पेआउट’ लेकर भारत को बदनाम करने वालों की अब खैर नहीं। IT एक्ट 2000 और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड 2021 के तहत सरकार ने सख़्त रुख अपनाया है। अब देशविरोधी कंटेंट पर न तो चुप्पी होगी, न छूट। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अफवाह […]

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संकट का व्यापार: राशन कालाबाजारी पर सरकारी सख्ती, जमीनी हकीकत और खोखले वादे

राशन की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के दावे एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे या जमीनी स्तर पर भी असर दिखाएंगे? इतिहास गवाह है कि संकट के समय महंगाई, जमाखोरी और भ्रष्टाचार बढ़ जाते हैं, और प्रशासनिक उदासीनता से हालात और बिगड़ते […]

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हर टास्क में सक्षम है हिन्द की सेना, Air Chief Marshal आरकेएस भदौरिया से खास बातचीत

पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव का माहौल है. माना जा रहा है कि भारत पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक जैसी किसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे सकता है. इस बीच, पूर्व भारतीय वायु सेना प्रमुख Air Chief Marshal ने Ion Bharat के प्रेसिडेंट अभिषेक मेहरोत्रा से एक्सक्लूसिव बातचीत […]

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सोशल मीडिया युग में करुणा की कैद: क्या किसी की भूख की तस्वीर लेना जरूरी है?

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार सोशल मीडिया के युग में भलाई और करुणा अब मौन संवेदनाएँ नहीं रहीं, वे कैमरे के फ्रेम में क़ैद होती जा रही हैं। आज अधिकांश मदद ‘लाइक्स’ और ‘फॉलोवर्स’ के लिए की जाती है, न कि सच्ची इंसानियत से। सहायता अब एक ‘कंटेंट’ बन चुकी है और ज़रूरतमंद […]

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“जब खबरें बनती हैं हथियार: युद्ध, प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज”

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार युद्ध के दौरान फैलाई गई झूठी खबरें न केवल सैनिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि समाज में भय और नफरत का भी प्रसार करती हैं। यह न केवल जनता की भावनाओं को भड़काती है, बल्कि सच्चाई की नींव को भी कमजोर करती […]

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सिंदूर की सौगंध: ‘एक था पाकिस्तान’ की गूंज, इतिहास के पन्नों में सिमटता सच

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार “एक था पाकिस्तान” – ये केवल तीन शब्द नहीं, बल्कि इतिहास की एक गहरी दास्तां है। यह उस विभाजन का प्रतीक है, जिसने दिलों को तोड़ा और घरों को उजाड़ा। लेकिन क्या हमें हमेशा इस नफरत के जाल में फंसे रहना चाहिए? हमें न केवल बाहरी दुश्मनों से, […]

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“देश के दुश्मन दो नहीं, अब तीन हैं: आर-पार की जंग और आधे मोर्चे की चुनौती”

“सीमाओं से परे: देश के भीतर पलते आधे मोर्चे की साज़िश” “तीसरा युद्धक्षेत्र: जब देश का दुश्मन भीतर होता है” डॉ सत्यवान सौरभ भारत आज दो नहीं, तीन मोर्चों पर जूझ रहा है—बाहरी आतंक, सीमापार दुश्मन और भीतर छिपा ‘आधा मोर्चा’। पहलगाम आतंकी हमले ने जहां सुरक्षा पर सवाल उठाए, वहीं पंजाब-हरियाणा जल विवाद ने […]

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“सीमा पार क़ैद एक सिपाही: गर्भवती पत्नी की पुकार और हमारी चुप्पी”

“पूर्णम को लौटाओ: एक अजन्मे बच्चे की पहली माँग” “देश चुप है, पत्नी नहीं: एक सिपाही की वापसी की जंग” प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार बीएसएफ़ के जवान पूर्णम साहू पिछले एक सप्ताह से पाकिस्तान के कब्ज़े में हैं। वह ड्यूटी के दौरान सीमा पार कर गए और तबसे कोई प्रत्यक्ष संपर्क नहीं […]

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“PR मैनेजमेंट के चंगुल में फंसा आज का कलमकार, मैनेजर जी रहे लग्जरी लाइफ, पत्रकार टूटी बाइक पर”

“मैनेजमेंट के मखमली पर्दे के पीछे दम तोड़ती पत्रकारिता” डॉ सत्यवान सौरभ आज की पत्रकारिता एक गहरे संकट से गुजर रही है, जहाँ कलमकार हाशिए पर हैं और PR मैनेजमेंट का बोलबाला है। पत्रकार, जो कभी सच की आवाज थे, अब टूटी बाइक पर सवार होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि मैनेजरों […]

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