नेताओं की अग्निपरीक्षा: देशभक्ति भाषणों से नहीं, भागीदारी से साबित होती है, सेना में बेटा भेजो, पेंशन लो!

डॉo सत्यवान सौरभ,कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट भारत में एक बार विधायक या सांसद बन जाना आजीवन पेंशन की गारंटी बन चुका है, चाहे उनका संसदीय रिकॉर्ड शून्य क्यों न हो। वहीं, सीमाओं पर तैनात सैनिक हर रोज़ जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन उनके परिवारों को न्यूनतम सुविधाएं भी संघर्ष से […]

Continue Reading

मजदूरों का भारत: शोषण के साए में खड़ा विकास

डॉ सत्यवान सौरभ “जिन हाथों ने इस देश की इमारतें खड़ी कीं, उन्हीं हाथों को आज रोटी, छत और पहचान के लिए जूझना पड़ रहा है। दिहाड़ीदार मजदूर केवल श्रम नहीं देते, वे इस देश की नींव हैं — लेकिन सबसे उपेक्षित भी। विकास की रफ्तार में उनका पसीना झलकता है, पर उनकी आवाज़ नहीं […]

Continue Reading

पहलगाम में आतंकी हमला: प्रश्न पूछने का अधिकार, लेकिन पहले संयम जरूरी…

प्रश्न पूछने के अवसर भी आएँगे, अभी राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय है। राष्ट्र सर्वोपरि। डॉ सत्यवान सौरभ हाल की पहलगाम घटना में एक हिंदू पर्यटक को आतंकवादियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि भारत की आत्मा पर हमला है। आतंकवादियों का उद्देश्य कश्मीर […]

Continue Reading

UPSC टॉपर या जाति टॉपर?… प्रतिभा गुम, जाति और पृष्ठभूमि का बाज़ार गर्म…

डॉ सत्यवान सौरभ देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा अब जातीय गौरव का तमाशा बन चुकी है। जैसे ही रिज़ल्ट आता है, प्रतिभा और मेहनत को धकिया कर जाति, धर्म और ‘किसान की झोपड़ी’ की स्क्रिप्ट सोशल मीडिया पर दौड़ने लगती है। एसी कमरों में पढ़ने वाले अब खुद को किसान का बेटा घोषित करते हैं, […]

Continue Reading

मीडिया का ‘वीर रस’ तमाशा: जब राष्ट्रवाद स्क्रीन पर चमकता है और असली ज़िंदगी में पड़ जाता है धुंधला

प्रियंका सौरभ न्यूज़ चैनल राष्ट्रवाद को एक स्क्रिप्टेड तमाशे की तरह पेश करते हैं। रात में टीवी पर ऐसा माहौल बनाया जाता है मानो भारत ने पाकिस्तान पर हमला कर दिया हो, लेकिन असलियत में कुछ नहीं होता। मीडिया, फिल्मों और चुनावी भाषणों में सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सैन्य कार्रवाईयों का खूब प्रचार होता है, जबकि […]

Continue Reading

नेताओं की मोहब्बत और जनता की नादानी: राजनीति की रंगमंचीय दुश्मनी और जनता की असली बेवकूफी

डॉ सत्यवान सौरभ कभी किरण चौधरी और शशि थरूर मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़े होते हैं, कभी हिंदू-मुस्लिम के नाम पर पार्टियों की नीतियाँ बँटती हैं, और इसी बीच पिसती है आम जनता। क्या हमने कभी सोचा कि ये नेता तो एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं, कार्यक्रमों में एक-दूसरे की तारीफ़ भी कर देते […]

Continue Reading

पहलगाम हमला: साज़िश नहीं, बल्कि जिहादी विचारधारा की रक्तरंजित अभिव्यक्ति…

प्रियंका सौरभ पहलगाम हमला जिहादी मानसिकता का परिणाम है। मोदी सरकार ने हमेशा आतंकवाद का मुँहतोड़ जवाब दिया है।राजनीतिक आलोचना आतंकवाद के असली स्रोत से ध्यान भटकाती है। जातियों में बंटा समाज आतंक से निपटने में अक्षम होगा। हमें आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। एक ओर भारत जातियों, उपजातियों, विचारधाराओं और आस्थाओं […]

Continue Reading

अजमेर से इंस्टाग्राम तक: शिक्षा या शिकारी जाल? पढ़ी-लिखी लड़कियों को क्यों नहीं सिखा पाए हम सुरक्षित होना?

प्रियंका सौरभ अजमेर की छात्राएं पढ़ी-लिखी थीं, लेकिन वे सामाजिक चुप्पियों और डिजिटल खतरों से अनजान थीं। हमें यह स्वीकार करना होगा कि शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, सुरक्षा भी सिखाए। और परवरिश सिर्फ आज्ञाकारी बनाने के लिए नहीं, संघर्षशील और सचेत नागरिक बनाने के लिए होनी चाहिए। हमारी बेटियां फंसती नहीं हैं, फंसाई जाती हैं—और […]

Continue Reading

पहलगाम हमला: साजिश सिर्फ जान लेने की नहीं, छवि बिगाड़ने की भी

प्रियंका सौरभ कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुआ आतंकी हमला सिर्फ एक गोलीबारी नहीं थी—यह एक ऐसा खौफनाक संदेश था जिसमें गोलियों ने धर्म की पहचान पूछकर चलना शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनका धर्म पूछा, फिर उन्हें जबरन कलमा पढ़ने के लिए कहा, और इंकार करने […]

Continue Reading

अनट्रेंड दौड़ा रहे वाहन, लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे, जिम्मेदार कौन?

आगरा। आगरा जिले की सड़कों पर शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब सड़क दुर्घटनाएं न होती हों। रविवार रात को ही लें, जिले के तीन थाना क्षेत्रों में अलग-अलग हुई सड़क दुर्घटनाओं ने पांच लोगों की जान ले ली। ये हादसे बसई अरेला, खंदौली और एत्माद्दौला क्षेत्र में हुए। ये दुर्घटनाएं साबित कर […]

Continue Reading