अरावली की सिकुड़ती ढाल और दिल्ली का डूबता पर्यावरण

अरावली संरक्षण के दायरे को 100 मीटर की परिभाषा से सीमित कर देना—दिल्ली-एनसीआर की हवा, पानी और तापमान के लिए एक गहरी पर्यावरणीय चोट। डॉ सत्यवान सौरभ भारत के उत्तरी भूगोल में अरावली केवल एक पर्वतमाला नहीं, बल्कि एक जीवित पारिस्थितिक दीवार, एक भूजल भंडार, एक शीतलन तंत्र और एक धूल-रोधी प्राकृतिक ढाल के रूप […]

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धुंध में घिरा उत्तर भारत: यमुना मदद की पुकार में, दिल्ली के सत्ता गलियारों में अब भी सन्नाटा

बृज खंडेलवाल उत्तर भारत इस समय घने कोहरे और जहरीली हवा की चादर में लिपटा है। कई शहरों में हालात इतने गंभीर हैं कि सुबह की धुंध के बीच ताजमहल तक धुंधला पड़ जाता है। सांस लेते ही सीने में जलन महसूस होती है, और इसके पीछे खड़ी है लगातार बिगड़ती हवा और तेजी से […]

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सड़को पर मौत की रफ्तार, सड़क सुरक्षा पर गाल बजाती सरकार

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार भारत की सड़कों पर हर दिन लगभग चार सौ लोग अपनी जान गंवाते हैं। यह आँकड़ा किसी आपदा या महामारी से नहीं, बल्कि हमारी सड़कों पर व्याप्त अव्यवस्था और लापरवाही से जुड़ा है। अनेक योजनाएँ, अभियान और कानून बनने के बावजूद भारत आज भी दुनिया के सबसे अधिक […]

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सवालों के घेरे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

डॉ सत्यवान सौरभ विश्व राजनीति की अशांत मिट्टी पर खड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का नैतिक व संस्थागत आधार आज पहले से कहीं अधिक प्रश्नों से घिरा है। जब युद्ध बढ़ते जा रहे हैं, तब शांति का सबसे बड़ा संरक्षक स्वयं अपनी भूमिका सिद्ध करने में असफल दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) […]

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सड़क पर कफ़न बुनती सफ़ेद लाइट: सड़क हादसों की अनकही कहानी…

डॉ सत्यवान सौरभ रात में तेज़ सफ़ेद हेडलाइट्स सिर्फ़ आँखों को नहीं, बल्कि जीवन को भी चौंधिया देती हैं। हर साल हजारों लोग इसके कारण हादसों में मरते हैं। यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे परिवारों की टूटी ज़िंदगी है। समाधान आसान है – पीली हेडलाइट लगाएँ, तेज़ सफ़ेद लाइट से बचें, सरकार नियम […]

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आगरा शहर में नशे का उत्पात: सामाजिक कार्यकर्ता ने ठेकों को आबादी से हटाने की मांग की

आगरा। न्यू आगरा थाना क्षेत्र के नगला बूढ़ी में बेकाबू कार से सात लोगों के कुचले जाने और पांच की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि शहर में फैल चुके नशे के खुले उत्पात और प्रशासनिक लापरवाही की एक भयावह मिसाल बनकर सामने आया है। […]

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द वर्निंग बस- आखिर हादसों पर मौन क्यों…???

बृजेश सिंह तोमर(वरिष्ठ पत्रकार एवं आध्यात्मिक चिंतक) देश के हाईवे अब सफ़र के नहीं, लाशों के रास्ते बनते जा रहे हैं। ताज़ा घटना मध्यप्रदेश के शिवपुरी–इंदौर मार्ग की है, जहाँ अशोकनगर के पास एक बस में अचानक आग लग गई। संयोग से घटना का समय नींद का नही था लिहाजा यात्रियों की जान तो बच […]

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पराली जलाने की आग में झुलसता उत्तर भारत : समाधान किसानों और पर्यावरण दोनों के हित में..

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार हर वर्ष अक्टूबर–नवंबर के महीनों में पंजाब और हरियाणा के खेतों से उठने वाला धुआँ दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत की साँसें रोक देता है। पराली जलाना किसानों की विवशता और नीतिनिर्माताओं की विफलता दोनों का परिणाम है। जब तक किसान के हित, कृषि की आवश्यकताएँ और पर्यावरण […]

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अब सुरक्षित रहेगा सोशल मीडिया: इंस्टाग्राम ने 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए लगाई आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक

डॉ सत्यवान सौरभ इंस्टाग्राम ने 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को आपत्तिजनक कंटेंट से दूर रखने के लिए PG-13 आधारित फ़िल्टर प्रणाली लागू की है। इससे नाबालिग यूज़र्स हिंसक, यौन या मानसिक रूप से हानिकारक सामग्री नहीं देख पाएंगे। माता-पिता अब “सीमित कंटेंट सेटिंग्स” से बच्चों की गतिविधियों पर नज़र रख सकेंगे। यह […]

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त्योहारों का सेल्फ़ी ड्रामा: जब भक्ति ऑफ़लाइन और दिखावा ऑनलाइन हो गया

अब त्योहार पूजा, मिलन और आत्मिक उल्लास का नहीं, बल्कि ‘कंटेंट’ का मौसम बन गए हैं। दीपक की लौ से ज़्यादा रोशनी अब मोबाइल की फ्लैश में दिखती है। भक्ति, व्रत और परंपराएँ अब फ़िल्टर और फ्रेम में सिमट गई हैं। लोग ‘सेल्फ़ी विद गणेश’, ‘करवा चौथ वाइब्स’ और ‘भाई दूज मोमेंट्स’ जैसे टैग से […]

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