”विचार से डरेगा समाज तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?”— मनोज रूपड़ा प्रकरण पर डॉ. प्रियंका सौरभ का बेबाक विश्लेषण
प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ हुआ सार्वजनिक दुर्व्यवहार केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे समय के अकादमिक और सांस्कृतिक जीवन में गहराते संकट का स्पष्ट संकेत है। किसी आमंत्रित लेखक […]
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