इश्क का समंदर है रक्षिता सिंह की ये गजल, आप भी गुनगुनाइए

जरा ज़ुल्फें हटाओ चाँद का दीदार मैं कर लूँ ! वस्ल की रात है तुमसे जरा सा प्यार मैं कर लूँ !! बड़ी शोखी लिए बैठा हूँ यूँ तो अपने दामन में ! इजाजत हो अगर तो इनको हदके पार मैं करलूँ!! मुआलिज है तू दर्दे दिल का ये अग़यार कहते हैं! हरीमे यार में … Continue reading इश्क का समंदर है रक्षिता सिंह की ये गजल, आप भी गुनगुनाइए