मुंबई (अनिल बेदाग)। मुंबई की एक शाम आध्यात्मिक इतिहास में दर्ज हो गई, जब चिन्मय मिशन के आह्वान पर बारकू पाटिल उद्यान में पाँच हज़ार से अधिक लोग एक साथ, एक ही स्वर और एक ही भाव के साथ भगवद्गीता के 15वें अध्याय ‘पुरुषोत्तम योग’ के समष्टि (सामूहिक) पाठ में शामिल हुए। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्ति को अनुभूति और ज्ञान को जीवन-व्यवहार में उतारने का प्रेरक संदेश बनकर सामने आया।
शनिवार की इस संध्या जैसे ही गीता के श्लोकों की लय वातावरण में गूंजी, पूरा परिसर ध्यान, श्रद्धा और आत्मिक ऊर्जा से भर उठा। वर्ष 2026 में चिन्मय मिशन के 75वें वर्ष में प्रवेश के प्रतीक स्वरूप आयोजित यह समष्टि गीता पाठ, मिशन के संस्थापक पूज्य स्वामी चिन्मयानंद के उस विजन को साकार करता दिखाई दिया, जिसमें गीता को केवल ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन-दर्शन के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी जाती है।
25 स्कूलों के 1500 छात्रों की सहभागिता बनी आकर्षण
इस विशाल आध्यात्मिक समागम में 25 स्कूलों के लगभग 1500 विद्यार्थियों की सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि युवा पीढ़ी भी भारत की आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने और उसे समझने की दिशा में आगे बढ़ रही है। गीता पाठ का नेतृत्व लगभग 90 विद्यार्थियों ने किया, जो चिन्मय मिशन द्वारा आयोजित गीता प्रतियोगिताओं के विजेता रहे। इन विद्यार्थियों ने शुद्ध उच्चारण, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ पाठ को दिशा दी, जिससे पूरे आयोजन में एक अद्भुत समरसता और आध्यात्मिक अनुशासन का अनुभव हुआ।
भजन, लघु फिल्म और लाइट-एंड-लेजर प्रस्तुति ने बढ़ाया प्रभाव
कार्यक्रम के दौरान भजन संध्या, गुरुदेव पर आधारित प्रेरणादायी लघु फिल्म और आकर्षक ‘लाइट-एंड-लेजर’ प्रस्तुति ने आयोजन को और भी प्रभावशाली बना दिया। श्रोताओं और श्रद्धालुओं ने न केवल गीता पाठ में भाग लिया, बल्कि पूरे कार्यक्रम के दौरान आत्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव किया।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि जब हजारों लोग एक साथ गीता का पाठ करते हैं, तो यह केवल पाठ नहीं रह जाता, बल्कि वह दर्शन से आगे बढ़कर सामूहिक आंतरिक अनुभव बन जाता है। यह अनुभव व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाता है और उसे आत्मबोध की ओर प्रेरित करता है।
सामूहिक पाठ ने दिया आध्यात्मिक एकता का संदेश
चिन्मय मिशन द्वारा आयोजित यह समष्टि गीता पाठ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत झलक बनकर सामने आया। इसमें भाग लेने वाले श्रद्धालुओं का कहना था कि गीता का सामूहिक पाठ मन को एकाग्र करता है, जीवन में अनुशासन लाता है और कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देता है।
इस आयोजन ने यह भी सिद्ध किया कि भगवद्गीता आज भी लोगों को जोड़ने, दिशा देने और भीतर से सशक्त करने की अपार शक्ति रखती है। हजारों लोगों का एक साथ एक स्वर में श्लोक पाठ करना न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना, बल्कि समाज में एकता, संस्कार और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का संदेश भी दे गया।
समापन पर मिशन पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि जीवन में नैतिकता, सद्भाव और आत्मिक शांति का विस्तार हो।
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